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पति-सास की मौत के बाद विधवा ने खेत में डाला डेरा

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घर में ताला लगाकर अपने बच्चों के साथ खेत जाती विधवा। - फोटो : BANDA
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अतर्रा। खेती का जिम्मा संभाले मां-बेटे की मौत के बाद अब खेती का जिम्मा मृतक बेटे की पत्नी पर आ गया है। सास और पति का अंतिम संस्कार निपटते ही विधवा ने चार मासूम बच्चों के साथ खेत में डेरा डाल दिया है। उस पर 12 हजार रुपये कर्ज अदायगी का भी जिम्मा है। गरीब किसान के घर दोहरी मौतों के बाद भी न तो कोई अधिकारी पहुंचा और न जनप्रतिनिधि।
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तहसील क्षेत्र के खम्हौरा गांव में शुक्रवार को विधवा डेबरी (70) पत्नी कलुवा की शुक्रवार की सुबह हार्टअटैक से मौत हो गई थी। 24 घंटे बाद अगले दिन उसके पुत्र रामलाल (36) की भी हार्टअटैक से मौत हो गई। मृतक की पत्नी और परिजनों ने फसल की बर्बादी और कर्ज की चिंता दोहरी मौतों की वजह बताई।
परिजनों ने दोनों शवों का पोस्टमार्टम नहीं कराया और अंतिम संस्कार कर दिया। शनिवार को अंतिम संस्कार के बाद खेत में बचीखुची फसल की रखवाली के लिए मृतक रामलाल की विधवा गुड्डू अपने चार मासूम बच्चों 13 वर्षीय शीलू, 10 वर्षीय रामखिलावन, 8 वर्षीय राजा और 5 वर्षीय बाबू के साथ घर में ताला बंद कर खेत में रखवाली करने लगी है।
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इस परिवार के पास गरीबी रेखा के नीचे का राशन कार्ड नहीं है। न ही शौचालय और प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला है। बताया कि अपनी भूमि के अलावा के दो बीघा भूमि निरंजन सिंह की बटाई पर ली है। मृतक रामलाल के बड़े भाई सियाराम, जुग्गीलाल, सुखलाल ने कहा कि उनके पास सवा-सवा बीघे भूमि है। परदेस में मजदूरी करके गुजारा कर रहे हैं। उधर, गरीब किसान मां-बेटे की दोहरी मौतों के बाद कोई जनप्रतिनिधि या बड़ा अधिकारी गांव नहीं पहुंचा। एसडीएम सौरभ शुक्ला ने बताया कि राजस्व कर्मियों ने मौके पर जाकर जांच की है।
बीमारी से हुई मौत, दैवी आपदा में शामिल नहीं
बांदा/अतर्रा। खम्हौरा गांव में मां-बेटे की मौत पर अतर्रा तहसीलदार सुशील कुमार सिंह ने एडीएम को भेजी रिपोर्ट में कहा है कि क्षेत्रीय लेखपाल और राजस्व निरीक्षक ने खम्हौरा गांव जाकर जांच की है। उनकी रिपोर्ट के मुताबिक रामलाल बीमार रहता था। उसकी मौत बीमारी से हुई है।
उसके भाई सियाराम और गांव वालों के बयान दर्ज किए गए हैं। मां डेबरी पत्नी कलुवा का एक दिन पूर्व निधन हुआ था। तहसीलदार ने स्वीकारा कि मृतक के परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है, लेकिन खाने-पीने की समस्या नहीं है। यह भी कहा है कि मृतक रामलाल 0.054 हेक्टेयर खुद की और शेष बटाई की भूमि पर खेती कर परिवार का पालन-पोषण करता था। इस भूमि में धान की फसल बोई है, जो अच्छी स्थिति में है। परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया है। तहसीलदार ने कहा है कि बीमारी की मौत दैवी आपदा के अंतर्गत नहीं आती।
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