बांदा। कैंसर पीड़ित मां से मिलने और काशी विश्वनाथ के दर्शन के बाद वापस लौट रहे इंजीनियर के सपने सड़क हादसे में खत्म हो गए। साथ ही उसकी पत्नी, सास के बाद देर रात बेटी ने भी दम तोड़ दिया। अब उसके घर में सिर्फ इकलौता बेटा बचा है। मृतक का साला ही यहां पहुंच सका, उसी की मौजूदगी में पोस्टमार्टम हुए। चारों शव उसी के सौंप दिए गए। दोनों वाहनों से लेकर वह भिलाई (छत्तीसगढ़) ले गए।
सोमवार को नेशनल हाईवे पर गिरवां थाना क्षेत्र के डिंगवाही गांव के नजदीक तेज रफ्तार कार पेड़ में टकरा जाने से ग्रीन एवेन्यू (सटई रोड, छतरपुर, एमपी) निवासी राकेश सिंह और उसकी पत्नी वंदना व सुतैला (दुर्ग, छत्तीसगढ़) निवासी सास चंद्रावती बिशेन की मौके पर मौत हो गई थी। 11 वर्षीय बेटी अनविका की देर रात अस्पताल में मौत हो गई।
मंगलवार को चारों शवों का पोस्टमार्टम हुआ। हालांकि पंचनामा के कागजी प्रक्रिया में लेटलतीफी से शवों के पोस्टमार्टम में काफी देर हुई। मृतक के साले रतन सिंह (दुर्ग) ने बताया कि राकेश की मां कैंसर से ग्रसित हैं और वाराणसी के अस्पताल में भर्ती हैं। उन्हें देखकर परिवार सहित वापस लौट रहे थे।
यह भी बताया कि हाल ही में छतरपुर स्थित प्राइवेट कंपनी को छोड़कर नोएडा में राकेश को नौकरी मिल गई थी। घर में पैसों की जरूरत के चलते उसे अच्छे पैकेज की नौकरी की तलाश थी। नोएडा की कंपनी में अगले माह ज्वाइनिंग थी। अब राकेश के घर में एकलौता चिराग 17 वर्षीय नितिन है। वह नोएडा में पढ़ाई कर रहा है।