बांदा। मानवाधिकार कार्यकर्ता अधिवक्ताओं ने मंडलायुक्त को सामूहिक हस्ताक्षर से ज्ञापन दिया है। इसमें कहा है कि 7 मई को दिन में बिना कोई कारण बताए सिटी मजिस्ट्रेट ने रफीक नर्सिंगहोम (अलीगंज) को सील कर दिया। सील उस समय किया गया जब अस्पताल की चाइल्ड केयर यूनिट में पांच नवजात शिशु एनआईसीयू में थे। तीन गर्भवती महिलाएं प्रसव पीड़ा में पड़ी थीं।
अधिवक्ताओं ने कहा कि डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट का उपयोग मानव जीवन की रक्षा के लिए है, मौत में झोंकने के लिए नहीं। यह कृत्य शासन की गाइडलाइन के विरुद्ध है। यह भेदभावपूर्ण कार्रवाई है। कोरोना वारियर्स नर्सिंग स्टाफ का सम्मान नहीं है। यह अस्पताल खांईपार हॉटस्पाट में नहीं आता। सील करना अंधेरगर्दी है।
अधिवक्ताओं ने मंडलायुक्त से तत्काल हस्तक्षेप करने और सील हटवाकर गर्भवती महिलाओं की प्रसव और जांच सुविधा तथा बीमारों का इलाज बहाल करने का अनुरोध किया। ज्ञापन देने वालों में अधिवक्ता प्रवीण शास्त्री, शिवकुमार मिश्रा, द्वारिकेश सिंह मंडेला, सैय्यद अली मंजर, श्याम सुंदर सिंह राजपूत, संजय कुमार श्रीवास्तव, भूपति यादव, सहित पूर्व सपा जिलाध्यक्ष शमीम बांदवी और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हाजी शकील अली इत्यादि शामिल है।
उधर, मंडलायुक्त गौरव दयाल ने बताया कि डीएम ने खुद नर्सिंगहोम का निरीक्षण किया था। वहां सोशल डिस्टेंसिंग और लॉकडाउन नियमों का उल्लंघन होने पर यह कार्रवाई की गई है। आयुक्त ने कहा कि अस्पताल के संचालक ये गड़बड़िया दुरुस्त कर डीएम से अनुरोध कर सकते हैं।