बांदा। आजीविका मिशन की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों में वितरित होने वाले पुष्टाहार का उपभोग प्रमाण पत्र न देने पर डीएम ने कड़ा रुख अपनाते हुए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) उपायुक्त से दो दिन में उपभोग प्रमाण पत्र तलब किया है। वरना कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी है। एनआरएलएम को हर तीन महीने में एक करोड़ रुपये दिए जाते हैं। पिछले दो वर्षों में पुष्टाहार के लिए लगभग आठ करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं।
आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन व पुष्टाहार बांटने का काम पहले बाल पुष्टाहार विभाग करता था। वर्ष 2019-20 में सरकार ने यह जिम्मेदारी एनआरएलएम को सौंप दी थी। स्वयं सहायता समूह के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों में पुष्टाहार के रूप में प्रति बच्चा/धात्री महिला डेढ़ किलो गेहूं, एक किलो चावल, चने की दाल, गेहूं का पौष्टिक दरिया, मिल्क पाउडर और सरसों का तेल दिया जाता है। पहले पुष्टाहार की धनराशि सीधे आंगनबाड़ी केंद्रों के खातों में भेजने की व्यवस्था थी।
दो वर्ष पूर्व व्यवस्था में बदलाव करके नैफेड के जरिए स्वयं सहायता समूह को पुष्टाहार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई। विभाग प्रति तिमाही नैफेड के माध्यम से एक करोड़ से अधिक का पुष्टाहार आजीविका मिशन को देता है। लेकिन आजीविका मिशन ने आज तक पुष्टाहार वितरण का हिसाब नहीं दिया। इस पर डीएम ने एनआरएलएम उपायुक्त को पत्र भेजकर तत्काल पुष्टाहार वितरण का ब्योरा देने को कहा है।
जिले शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में 1705 आंगनबड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें 6 माह से 3 वर्ष तक के 82,492, 3 से 6 वर्ष तक के बच्चे 20701 व 31243 गर्भवती/धात्री महिलाओं सहित 4320 कुपोषित बच्चे पंजीकृत हैं। इन्हें स्वस्थ बनाने के लिए पुष्टाहार दिया जाता है।
आंगनबाड़ी राजकुमारी, बीना, रामदेवी का कहना है कि जब से पोषाहार वितरण का जिम्मा एनआरएलएम की स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को दिया गया है, तब से बच्चे व धात्री महिलाओं की संख्या की अपेक्षा सिर्फ 60 फीसदी को ही पोषाहार आ रहा है। इससे आए दिन केंद्रों विवाद हो रहे हैं।
आंगनबाड़ी केंद्रों को दिए जाने वाले पुष्टाहार का विवरण मंगाया गया है। पुष्टाहार विभाग को जल्द ही वितरण की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
डॉ. रवि किशोर त्रिवेदी, प्रभारी उपायुक्त (एनआरएलएम), बांदा