अशोक लाट पर शव रखकर जाम लगाए परिजन और ग्रामीण।
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बांदा/बदौसा। बेटी के अपहरण मामले में पुलिस की बेरुखी से क्षुब्ध दलित ने आत्महत्या कर ली। लापता किशोरी को बरामद करना तो दरकिनार पुलिस ने रिपोर्ट भी दर्ज नहीं की। उत्तेजित परिजनों और ग्रामीणों ने मंडल मुख्यालय कचहरी के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर शव रखकर जाम लगाकर हंगामा किया। डेढ़ घंटे बाद सिटी मजिस्ट्रेट और क्षेत्राधिकारी ने देर तक समझा-बुझाकर जाम खत्म कराया।
फतेहगंज थाना क्षेत्र के बघेलाबारी गांव निवासी शिवचरण (45) पुत्र रामबहोरी श्रीवास ने गुरुवार को तड़के घर में जहर खा लिया। परिजन फतेहगंज से उसे कर्वी ले जा रहे थे। तभी रास्ते में उसकी मौत हो गई। परिजनों और ग्रामीणों ने कुछ देर बघेलाबारी तिराहे पर जाम लगाया फिर शव लेकर बांदा आ गए।
यहां लगभग एक सैकड़ा ग्रामीण व परिजनों ने स्वतंत्रता स्मारक अशोक लाट के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर शव रखकर जाम लगा दिया। मृतक की पत्नी ऊषा समेत तमाम महिलाएं भी शामिल थीं। देर तक प्रशासन या पुलिस का कोई अधिकारी नहीं आया। इस दौरान उत्तेजित ग्रामीण राहगीरों से बदसलूकी भी करते रहे। पुलिस विरोधी नारे लगातार लगते रहे। नरैनी सीओ और कोतवाल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते रहे। पैदल चलने वालों को भी स्कूल, कचहरी, अस्पताल आदि आने-जाने नहीं दिया। तमाम वाहन देर तक फंसे रहने के बाद लौट गए और दूसरे रास्तों से आगे बढ़े। लगभग डेढ़ घंटा बाद आए सिटी मजिस्ट्रेट आरके श्रीवास्तव प्रभात कुमार ने मौके पर आकर परिजनों से बात की और उन्हें पूरा न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया। इसी के बाद जाम खत्म हुआ। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
पत्नी ऊषा ने बताया कि नरैनी कोतवाली में घटना की रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। क्षेत्राधिकारी ने भी मदद नहीं की। उल्टा दोनों अधिकारी जबरापुर गांव निवासी आरोपी युवक से मिलकर मामला खत्म करने का दबाव बनाते रहे। इन्हीं सब बातों से क्षुब्ध होकर उसके पति (अपहृत पुत्री के पिता) शिवचरण ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। इस बारे में नरैनी कोतवाली प्रभारी ने बताया कि लड़की स्वेच्छा से गई है। वह बालिग है। उसने कर्वी मेें अदालत में अपने यही बयान कलमबंद कराए हैं। इसलिए कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई है।