बांदा। शहर के नरैनी रोड स्थित दरगाह मिस्कीन शाह वारसी का सालाना चार दिवसीय उर्स शनिवार से शुरू हो गया। पहले दिन सुबह दरगाह में गुस्ल और संदल की रस्म अदा की गई। इसके बाद चादरपोशी हुई। इसके बाद कव्वालियों की महफिल सजी।
कव्वाल दिलबर ताज ने कलाम पढ़ा कि देख लो शक्ल मेरी किसका आईना हूं मैं। वकील साबरी ने कलाम सुनाया, बहश्त में भी पहुंच कर मुझे करार नहीं। शहज़ादे ने पढ़ा, अदम से लाई है हस्ती में आरजू ए रसूल।
सैय्यद सरावां से आए कव्वाल अब्दुल हफ़ीज़ ने कलाम पढा, इश्क में तेरे कोहे गम सर पे ले लिया जो हो सो हो। खानकाही कव्वालियों के बाद स्व. सगीर हुसैन वारसी के आवास से चादर जुलूस उठाया गया जो खानकाही कव्वालियों की धुनों के साथ अपने निर्धारित रास्ते से होता हुआ गूलर नाका स्थित मिस्कीन शाह वारसी की दरगाह के मुतवल्ली निज़ामुद्दीन फ़ारूकी के आवास पहुंचा।
आयोजन में अकीदतमंद व गुड्डन बाबा,कल्लन शाह वारसी, मलामत शाह वारसीय, मस्तान शाह वारसी,दरगाह के मुतवल्ली निज़ामुद्दीन फारूकी मौजूद रहे।