अतर्रा। गौराबाबा धाम मंदिर के पास प्राचीन घुम्मा तालाब जलकुंभी से पट गया है। नगर पालिका परिषद ने इसके सफाई और सुंदरीकरण की सुध नहीं ली। अफसरों ने वादा करने के बाद उसे भूल गए। हालात हैं कि तालाब में जलकुंभी के चलते श्रद्धालुओं की वहां स्नान करने की हिम्मत नहीं पड़ती। इसके साथ ही यहां अतिक्रमण और गंदगी की भी भरमार है।
स्वैच्छिक संगठनों, समाजसेवियों और अधिवक्ताओं ने पिछले वर्ष अभियान चलाकर घुम्मा तालाब की सफाई की थी। कृषि एवं पर्यावरण संस्थान निदेशक सुरेश रैकवार के नेतृत्व में शिक्षक, साधु-संत और श्रद्धालुओं ने भी तालाब की सफाई में भरपूर मेहनत की थी। तत्कालीन उप जिलाधिकारी व नगर पालिका अधिशासी अधिकारी लालचंद्र सरोज और निवर्तमान नगर पालिका परिषद अध्यक्ष भरतलाल कोटार्य ने तालाब में नालों का गंदा पानी पहुंचने से रोकने और जलकुंभी की सफाई के साथ सुंदरीकरण का वादा किया था। यह भी कहा था कि सुंदरीकरण के साथ मनोरंजन के लिए तालाब में छोटी-छोटी स्वचलित नाव की व्यवस्था होगी।
वक्त बीतने के साथ अधिकारी अपने वादे भूल गए। तालाब किनारे दलित बस्ती का कूड़ा-कचरा और नालियों का गंदा पानी पहुंचने से तालाब प्रदूषित हो गया। उधर, दोबारा जलकुंभी फैलने से पिछले वर्ष समाजसेवियों द्वारा की मेहनत बेकार चली गई। इस समय पूरा तालाब जलकुंभी से पटा पड़ा है। बुजुर्गाें का कहना है कि तालाब में पितरों को पानी अर्पित किया जाता था। गर्मी के दिनों में तालाब के पास भीड़ लगी रहती थी। पास के मंदिर में लोग पूजा-अर्चना करते थे। नगर पालिका की उदासीनता से तालाब का अस्तित्व संकट में है। समाजसेवी सुरेश रैकवार ने कहा है कि अधिकारियों को तालाबों के संरक्षण के लिए संवेदनशील होना चाहिए। उदासीनता से पुरानी धरोहरों का अस्तित्व मिट जाएगा।