बांदा। मकान सूचीकरण और जनगणना के बाद अब केंद्र सरकार ने सामाजिक, आर्थिक सर्वेक्षण और जातिगत गणना की तैयारी पूरी कर ली है। कई संगठनों के विरोध के बावजूद केंद्र सरकार की यह कवायद यह पहली जून से शुरू होगी। एक महीने बाद पहली जुलाई से दूसरा चरण शुरू होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में मुख्य विकास अधिकारी और शहरी क्षेत्र में अपर जिलाधिकारी को नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
पिछले वर्ष 2011 में सातवीं जनगणना की गई थी। यह दो चरणों में हुई थी। पहले चरण में मकान सूचीकरण और मकानों की गणना तथा दूसरे चरण में जनसंख्या की गणना की गई थी। पहला चरण अप्रैल से सितंबर 2010 में हुआ था। दूसरा चरण फरवरी-मार्च 2011 में निपटाया गया। यह काम पूरा हो चुका है। जनगणना के आंकडे़ भी जारी किए जा चुके हैं। अब केंद्र सरकार जातिगत गणना शुरू करा रही है। जातिगत जनगणना की बात पर कई संगठनों आदि ने इसका जोरदार तरीके से विरोध भी जताया लेकिन बाद में यह ठंडा पड़ गया। सरकारी योजना के मुताबिक जातिगत जनगणना का पहला चरण 1 जून से शुरू होगा और 30 जून तक चलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक, आर्थिक सर्वेक्षण और जातिगत गणना की जाएगी। दूसरा चरण पहली जुलाई से शुरू होगा। यह 31 जुलाई तक चलेगा। इसमें नगरीय क्षेत्र में सामाजिक, आर्थिक सर्वेक्षण व जातिगत गणना होगी।
ग्रामीण क्षेत्र के लिए मुख्य विकास अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। सर्वेक्षण और गणना कार्य की जिम्मेदारी ग्राम्य विकास विभाग को सौंपी गई है। शहरी क्षेत्रों में नोडल अधिकारी अपर जिलाधिकारी बनाए गए हैं। नगर विकास की देखरेख में प्रगणक और सुपरवाइजर सर्वेक्षण करेंगे। इसके लिए मास्टर ट्रेनरों का प्रशिक्षण 14 व 15 मई को होगा। मास्टर ट्रेनर प्रगणक और सुपरवाइजरों को प्रशिक्षण देंगे। यह 30 मई तक जिला मुख्यालय में होगा। शासन ने चार्ज अधिकारी तहसीलदार (ग्रामीण) और नगर पालिका अधिशासी अधिकारी (शहरी) से एक सप्ताह में प्रगणकों और सुपरवाइजरों की नियुक्ति के निर्देश दिए हैं।