फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

‘एच-1’ में शामिल दवाओं पर शिकंजा

विज्ञापन
विज्ञापन
शमीम अहमद
विज्ञापन

बांदा। मेडिकल स्टोरों पर बिकने वाली 46 दवाओं की खरीद-फरोख्त अब टेढ़ी खीर होगी। बिना रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर डाक्टर के पर्चे के बगैर किसी भी दुकान में यह दवाएं बेंची नहीं जा सकेगी। दवा विक्रेेता को रजिस्टर में डाक्टर का नाम, पता, रजिस्ट्रेशन लिखना होगा। मरीज का ब्योरा भी दर्ज करना होगा। यह नया शासनादेश पहली अप्रैल से लागू होगा।
एंटीबायोटिक और दिमाग पर असर करने वाली व टीबी की 46 दवाओं को केंद्र सरकार ने शेड्यूल ‘एच-1’ में शामिल कर दिया है। इसके मुताबिक थोक और फुटकर दवा विक्रेता किसी भी ग्राहक को यह दवाएं तभी देंगे तब वह अधिकृत डाक्टर का पर्चा पेश करेगा। दवा विक्रेता डाक्टर के इस पर्चे की फोटो कापी अपने साथ रखेगा। यह भी निर्देश हैं कि ग्राहक को कैश मेमो देना भी अनिवार्य होगा। साथ ही एक रजिस्टर में संबंधित डाक्टर का नाम, पता और रजिस्ट्रेशन नंबर तथा मरीज का नाम, पता और मोबाइल नंबर लिखना होगा। ड्रग इंस्पेक्टर आशुतोष कुमार मिश्र ने बताया कि इस बाबत सरकारी आदेश यहां प्राप्त हो चुका है। यह पहली अप्रैल से लागू हो जाएगा। हाल ही में दवा विक्रेताओं और डाक्टरों की कार्यशाला में इस नए नियम से उन्हें आगाह करा दिया गया है।
विज्ञापन

--
क्या है शेड्यूल ‘एच-1’
जिन दवाओं का लंबे समय तक लगातार इस्तेमाल करने से शरीर के विभिन्न अंगों में दुष्प्रभाव पड़ सकता है। उन दवाओं को इसमेें शामिल किया गया है। इस श्रेणी की दवाएं डाक्टर की सलाह के बिना खाने से नुकसान पहुंच सकता है।
--
इन दवाओं पर जरूरी होगा डाक्टर का पर्चा
अल्प्रैजोलम, बालोफ्लोक्सासीन, बूप्रेनोरफीन, कैप्रेओमाइसिन, सेफाडीनीर, सेफडीटोरन, सेफेपाइन, सेफेटामेट, सेफीजाइम, सेफोपेराजोन, सेफोटेक्सिम, सेफपीरोम, सेफवोडोजाइम, सेफ्टाजिडीम, सेफ्टीबुटेन, सेफ्टीजोजाइम, सेफ्टीयाजोन, क्लोरडाइजेपोक्साइड, क्लोफैजिमाइन, कोडीन, साइक्लोसेराइन, डाइजापाम, डीफेनोक्सीलेट, डोरिपेनेम, एरटापेनेम, इथामबुटोल हाइड्रोक्लोराइड, एथियोनामाइड, फेरोपेनेम, जेमीफ्लोक्सासीन, इमीपेनेम, इसोनियजीड, लेवोफ्लोक्सासीन, मेरोपेनाम, मीडाजोलाम, मोक्सीफ्लोक्सासीन, निट्राजेपाम, पेंटाजोसीन, पुलीफ्लोक्सासीन, पाइरोजोनामाइड, रिफाबुटीन, रिफाम्पिसिन, सोडियम पैरा-अमिनोसालिसाइलेट, स्पारफ्लोक्सासीन, थायसीटाजोन, टारामाडोल, जोलपीडेम।
विज्ञापन

--
इनमें से कुछ दवाएं लेकर अपने नशे की लत पूरी करने वालों को दुश्वारी होगी। हो सकता है कि इन दवाओं की कालाबाजारी भी शुरू हो जाए। जहर खुरानी गिरोह के सदस्य डायजापाम जैसी नशीली गोलियां बेरोकटोक खरीद कर यात्रियों आदि को लूटते हैं।
संतोष कुमार ओमर
अध्यक्ष-कैमिस्ट एंड ड्रेगिस्ट एसोसिएशन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें