बांदा। शहर में एक बार फिर सिनेमा का जादू दर्शकों के सिर चढ़कर बोलेगा। बंद हो चुके सिनेमाघरों को अगले वर्ष फिर से ‘मल्टीप्लेक्स’ में परिवर्तित कर चालू करने की तैयारी तेजी से चल रही है। आधुनिक सुख-सुविधाओं से लैस इन सिनेमाघरों की खासियत यह भी होगी कि मुंबई आदि से जो फिल्म जिस दिन रिलीज होगी उसी दिन सेटेलाइट के जरिए इन ‘मल्टीप्लेक्स’ में दिखाई जाएगी।
बांदा शहर में पांच सिनेमाघर मयूर, मृदंग, मल्हार, अमर और प्रकाश नाम से थे। कई वर्षों से यह पांचों बंद हैं। कई सिनेमाघरों का व्यावसायिक कारोबार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन शासन ने सिनेमाघरों का वजूद बरकरार रखने का फैसला लिया है। सिनेमाघर मालिकों को निर्देश दिए गए हैं कि अपने इनको आधुनिक सुख-सुविधाओं से लैस करते हुए मल्टीप्लेक्स के रूप में चालू करें। शहर के लगभग सभी टाकीजों के मालिकों ने इसके लिए मानचित्र बनवाकर विकास प्राधिकरण में स्वीकृति के लिए दाखिल किए हैं। अमर टाकीज के मानचित्र में कुछ कमियां होने से प्राधिकरण ने इसे दुरुस्त करने के लिए इसे वापस लौटा दिया है।
मनोरंजन कर निरीक्षक केपी गुप्ता ने बताया कि तैयार किए जा रहे मल्टीप्लेक्स 31 मार्च 2015 के पूर्व बनकर तैयार हो जाएंगे। इनको पांच साल तक टैक्स में छूट मिलेगी। बंद किया जा चुका अनुरक्षण शुल्क भी बहाल हो जाएगा। दर्शकों से यह शुल्क तीन रुपये प्रति टिकट वसूला जाता था। शासन ने इस पर रोक लगा दी। इससे सिनेमाघरों की आमदनी पर काफी असर पड़ा। उन्होंने बताया कि किसी भी मल्टीप्लेक्स सिनेमाघरों में 125 से कम सीटें नहीं होगीं। हालांकि यह बन रहे मल्टीप्लेक्स 250 सीटों वाले बताए जा रहे हैं। निरीक्षक ने बताया कि शासन ने पुराने सिनेमा घरों को तोड़ने की अनुमति इसी शर्त पर दी है कि उस स्थल पर नया सिनेमा घर तैयार किया जाए।
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‘मयूर मल्टीप्लेक्स’ में दो सिनेमाघर
बांदा। गूलर नाका में एक ही परिसर में स्थित मयूर, मल्हार और मृदंग टाकीजों के स्थान पर अब ‘मयूर मल्टीप्लेक्स’ तैयार किया जा रहा है। यहां दो सिनेमा घर होंगे। प्रत्येक की क्षमता 250 सीटें होंगी। पार्टनर संजय गुप्ता ने बताया कि मल्टीप्लेक्स शासनादेश के अनुसार बनाया जा रहा है। यह अगले वर्ष के अंत तक लगभग तैयार हो जाएंगे। एयरकंडीशन और लिफ्ट सुविधा से युक्त होंगे। परिसर में ही मार्केट और अन्य जन सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी।
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सिनेमाघर बंद होने से 30 लाख का घाटा
बांदा। शहर के पांचों सिनेमाघर बंद होने से मनोरंजन कर विभाग को हर वर्ष करीब 30 लाख रुपये राजस्व का घाटा हो रहा है। उधर, अतर्रा की एक मात्र नारायण टाकीज चालू है। उससे इस वर्ष अब तक 52,421 रुपये राजस्व मिला है। मनोरंजन कर निरीक्षक ने बताया कि वर्ष 2013-14 के लिए 34 लाख रुपये कर वसूली का लक्ष्य निर्धारित है। इसमें अब तक 14.25 लाख (42 फीसदी) प्राप्त कर लिया गया है। केबिल से 11 लाख और डीडीएच विक्रेताओं से 96 हजार रुपये राजस्व मिला है।
11 लाख बकाएदारी 82 के खिलाफ आरसी जारी
बांदा। मनोरंजन कर अदायगी में चूक करने वाले जनपद के 82 केबिल आपरेटर से वसूली के लिए आरसी जारी की गई है। इन पर 11.09 लाख रुपये की बकाएदारी है। केबिल आपरेटरों को 25 प्रतिशत टैक्स की दर से हर माह दो लाख 68 हजार रुपये देना होता है। बांदा में 4404, अतर्रा में 1128, नरैनी में 291, बबेरू में 399, बिसंडा में 62, तिंदवारी में 315, ओरन में 31 व करतल में 56 केबिल कनेक्शन धारक हैं। कर निरीक्षक ने बताया कि उनके कार्यालय में स्टाफ की भारी कमी है। मनोरंजन कर अधिकारी की कुर्सी खाली है। एक निरीक्षक भी कम है।