बांदा। खेती को उपजाऊ बनाने को संचालित ‘अपनी मिट्टी पहचानो’ योजना चित्रकूट मंडल में चौपट है। मृदा परीक्षण विभाग की प्रयोगशालाओं में 46 में 32 पद वर्षों से रिक्त हैं। वरिष्ठ शोध सहायक व शोध सहायकों की कमी से मिट्टी के नमूनों की जांच व कल्चर तैयार करने का काम कुछ गिने-चुने संविदा कर्मी कर रहे हैं। नमूनों की जांच संतोषजनक न होने पर किसान इससे कतरा रहे हैं।
शासन ने तीन साल पहले ‘अपनी मिट्टी पहचानो’ योजना चालू की थी। इसके तहत किसान अपने खेतों की मिट्टी का नमूना लेकर मृदा परीक्षण विभाग में देते हैं। यहां प्रयोगशाला में नमूनों की जांच कर मिट्टी में पोषकतत्वों की कमी का पता लगाया जाता है। इसके बाद कृषि विभाग के सहयोग से जरूरी पोषकतत्वों को खेत में डालकर उसे उपजाऊ बनाया जाता है।
चित्रकूट मंडल में मृदा परीक्षण विभाग में प्रयोगशाला तो हैं, पर यहां कोई नमूनों की जांच करने वाला नहीं है। मंडल मुख्यालय बांदा में 22 पद सृजित हैं। इनमें वर्ग एक में वरिष्ठ शोध सहायक के तीन पद हैं। इनमें दो पद वर्षों से रिक्त है। वर्ग दो में शोध सहायक के आठ पद हैं और सभी रिक्त हैं। वर्ग तीन में कनिष्ठ शोध सहायक के दो पद हैं। दोनों खाली हैं। चतुर्थ श्रेणी में छह पद सृजित हैं। तीन रिक्त हैं। दो वरिष्ठ लिपिकों की जगह एक से काम चलाया जा रहा है। कनिष्ठ लिपिक का एक पद है, वह भी खाली है। हमीरपुर प्रयोगशाला में आठ पद सृजित हैं। शोध सहायक के तीन, कनिष्ठ शोध सहायक का एक पद सालों से खाली है। चतुर्थ श्रेणी के तीन पदों में दो रिक्त हैं। महोबा में भी कमोवेश यही स्थिति है। वरिष्ठ शोध सहायक एक तथा शोध सहायक के तीन में से दो पद रिक्त हैं। कनिष्ठ शोध सहायक की कुर्सी भी अर्से से खाली है। चतुर्थ श्रेणी में तीन में दो खाली हैं। चित्रकूट में आठ पदों में चार पद रिक्त है।
मंडल में तहसील स्तर पर आठ प्रयोगशाला संचालित हैं। इनमें सभी संविदा कर्मी काम देख रहे हैं। प्रत्येक तहसील से एक-एक संविदा कर्मी को मंडल मुख्यालय में मृदा परीक्षण विभाग में लगाया गया है। ये मिट्टी के नमूनों की जांच में फर्ज अदायगी कर किसी तरह काम निपटा रहे हैं। कर्मचारियों की कमी का ही नतीजा है कि दलहनी फसलों की बुवाई होने के हफ्तों बाद राइजोवियम कल्चर के पैकेट तैयार किए गए। अब इन पैकेटों को लेने से किसान व गोदाम प्रभारी कतरा रहे हैं।