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सात माह बीते, नहीं शुरू हुआ ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट

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बांदा। शासन की मंजूरी के सात माह बाद भी राजकीय मेडिकल कालेज में सेंट्रल ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट की स्थापना नहीं हो सकी। इसकी लागत करीब दो करोड़ रुपये है। 80 लाख रुपये की पहली किस्त कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कारपोरेशन को जारी हो चुके हैं। प्लांट संचालन में लेटलतीफी पर मशीनरी के लिए टेंडर प्रक्रिया बताई जा रही है।
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राजकीय मेडिकल कालेज में मंडल के चारों जिलों बांदा, चित्रकूट, महोबा व हमीरपुर के मरीज भर्ती किए जा रहे हैं। पिछले वर्ष कोरोना काल में ऑक्सीजन की खपत बढ़ गई थी। पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पा रही थी। इस पर शासन ने मेडिकल कालेजों में सेंट्रल ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट स्थापित करने के निर्देश दिए थे। इसमें बांदा मेडिकल कालेज भी शामिल था। सात माह बीत गए और अब तक मेडिकल कालेज में प्लांट निर्माण शुरू नहीं हो सका, जबकि कोरोना की दूसरी लहर शुरू हो चुकी है। संक्रमित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में ऑक्सीजन की खपत भी बढ़ी है।
प्रधानाचार्य डा. मुकेश कुमार यादव ने बताया कि कार्यदायी संस्था के प्रबंध निदेशक को पत्र भेजकर शीघ्र प्लांट स्थापित करने को कहा है। शासन ने पिछले माह 80 लाख रुपये की पहली किस्त जारी की है। हवा से ऑक्सीजन बनाने के लिए विदेशी मशीनों की खरीद होनी है। संस्था के अफसरों का कहना है कि मशीनों की खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। एक सप्ताह में प्लांट चालू करने का आश्वासन दिया है। मौजूदा में मेडिकल कालेज में 10 से 40 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन की खपत है। कानपुर से सिलिंडर के जरिए ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा रही है।
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