बांदा। बुंदेलखंड की धरती पर इस साल रबी की फसल
लहलहाने के सरकारी मंसूबे धरे रह गए। चित्रकूटधाम मंडल में 9,46,441
हेक्टेअर भूमि में बुआई का लक्ष्य था।
सूखे के चलते सिर्फ 2,95,814
हेक्टेयर (31 फीसदी) भूमि पर ही बुआई हो सकी। सूखे की मार महोबा में सबसे
ज्यादा पड़ी। यहां अभी सिर्फ 10 फीसदी बुआई हुई है।
मंडल में सबसे
अधिक 4,76,900 हेक्टेयर में दलहनी फसलों का लक्ष्य था। इसमें बांदा में
1,35,098, हमीरपुर में 1,39,522, महोबा में 1,38,135 और चित्रकूट में
64,145 हेक्टेयर का लक्ष्य था, लेकिन मात्र 1,44,717 हेक्टेयर में ही बुआई
हो पाई।
महोबा में सबसे कम 12,494, हमीरपुर में 32,010, बांदा में 81,430 और चित्रकूट में 18,783 हेक्टेयर में दलहन की बुआई हुई है।
उधर,
हमीरपुर में 1,13,945, महोबा में 69,976, बांदा में 1,52,516 और चित्रकूट
में 54,796 हेक्टेयर मिलाकर 3,91,233 हेक्टेयर में गेहूं बुआई का लक्ष्य
कृषि विभाग ने तैयार किए थे।
इस पर सिर्फ 1,23,912 हेक्टेयर (31
फीसदी) में गेहूं की बुआई हो पाई। महोबा में 7860, हमीरपुर में 30,550,
बांदा में 64,680 और चित्रकूट में मात्र 20,822 हेक्टेयर में गेहूं की बुआई
हो पाई।
तिलहन के लिए मंडल में 58,657 हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले
21,635 हेक्टेयर में बुआई हो पाई है। इसमें बांदा में 7,563, महोबा में
1,797, हमीरपुर में 8,205 और चित्रकूट में 4,070 हेक्टेयर में बुआई हुई।
प्रशासन
अभी सूखा राहत का सर्वे करा रहा है, लेकिन शासन ने फौरीतौर पर चित्रकूटधाम
मंडल को 60 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी कर दी है।
चारों जिलों
को 15-15 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। बुंदेलखंड में सूखे से हायतौबा
मची है। जिला स्तर पर प्रशासन अभी सर्वे की बात कहकर शासन को कोई रिपोर्ट
नहीं भेज सका है।
ऐसे में प्रदेश सरकार ने खुद पहल करते हुए सूखा
राहत कार्यों के लिए मंडल को 60 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। प्रदेश शासन के
प्रमुख सचिव (राजस्व) ने 26 दिसंबर को इसका आदेश जारी किया है।