बांदा। लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के बाद मध्य प्रदेश की सरहद पर बालू का अवैध खनन और तेज हो गया है। यूपी की भाजपा और एमपी की कांग्रेस सरकारों में अपना रसूख जमाए बाहरी ठेकेदार रायल्टी राजस्व को जमकर चूना लगा रहे हैं। पोकलैंड मशीनों का इस्तेमाल दिन रात चल रहा है। खदान का सीमांकन नहीं हुआ है।
ग्रामीणों सहित सीमावर्ती गौरिहार (मध्य प्रदेश) के मवई घाट सरपंच आदि ने बताया कि जरर खदान में दबंगईपूर्वक अवैध खनन हो रहा है। छह से ज्यादा एलएनटी और पोकलैंड मशीनें चल रही हैं। खदान का सीमांकन नहीं हुआ। न ही पिलर लगवाए गए हैं। सरपंच का कहना है कि आपत्ति जताने पर दबंग ठेकेदार तरह-तरह की धमकी देते हैं। विभागीय अधिकारी भी चुप्पी साधे हैं। निरीक्षणों के नाम पर खानापूर्ति हो रही है।
उधर, सदर तहसील के हटेटी पुरवा गांव के ग्रामीणों ने सामूहिक हस्ताक्षरों से शासन व प्रशासन को भेजी अर्जी में कहा है कि केन नदी से दिन रात बालू का अवैध खनन हो रहा है। बालू के ट्रैक्टर दिन रात गांव की आबादी के बीच से दौड़ रहे हैं। कई ट्रैक्टर नाबालिग चला रहे हैं।
ग्रामीणों या बच्चों की जान को खतरा है। धूल और प्रदूषण से पूरा गांव परेशान है। विरोध करने पर दबंगई पर आमादा होते हैं। उधर, जिला खनिज अधिकारी शैलेंद्र ने अपना मोबाइल फोन रिसीव नहीं किया। उनका पक्ष नहीं जाना जा सका।