अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। मुख्य विकास अधिकारी रामकुमार सिंह ने मनरेगा मजदूरों के भुगतान में विलंब किए जाने पर नरैनी और महुआ के बीडीओ तथा बिसंडा के लेखाकार को कारण बताओ नोटिस जारी की है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है।
नोटिस में सीडीओ ने मनरेगा उपायुक्त के पत्रों का हवाला देते हुए कहा है कि मनरेगा में हर रोज डैशबोर्ड का अनुश्रवण और निर्धारित समय सीमा के अंदर मस्टररोल फीड कराने के निर्देश दिए गए थे कि भुगतान में देरी न हो। लेकिन जसपुरा के बीडीओ रजनीश शुक्ला ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। ग्राम पंचायत चंदवारा में 13 मनरेगा मजदूरों के भुगतान की स्थिति बेहद खराब पाई गई। जसपुरा की कई अन्य ग्राम पंचायतों में भी यही स्थिति है। सीडीओ ने नरैनी बीडीओ लालव्रत यादव को भेजी नोटिस में कहा है कि मनरेगा मजदूर चुनूबाद, श्यामदीन, हरी, सुमित्रा व मिंता की मजदूरी का भुगतान विलंब से किया गया। इसके अलावा और भी कई ग्राम पंचायतों में मजदूरी देरी से दी गई। उधर, बिसंडा ब्लाक में तैनात लेखाकार नागेंद्र दीक्षित से सीडीओ ने स्पष्टीकरण मांगा है। यहां डैशबोर्ड में प्रथम हस्ताक्षरकर्ता पर 11 मस्टररोल के एफटीओ लंबित पाए गए। ये विलंबित भुगतान की श्रेणी में आ गए हैं। दोनों बीडीओ व लेखाकार को उन्होंने तीन दिन में संतोषजनक जवाब न देने पर कार्रवाई की चेतावनी दी।
मुख्य विकास अधिकारी ने महुआ ब्लाक के तकनीकी सहायक संजय त्रिपाठी और बबेरू ब्लाक के लेखा सहायक (मनरेगा) शैलेंद्र त्रिपाठी का सितंबर का वेतन रोक दिया। उन्होंने कहा कि मनरेगा के तहत जीओ मनरेगा फेज-2 के प्रशिक्षण के लिए 4 सितंबर को लखनऊ जाने का आदेश दोनों कर्मचारियों को दिया गया था लेकिन दोनों नहीं गए। इससे स्पष्ट है कि दोनों कर्मचारी स्वेच्छाचारी और उच्चाधिकारियों के दिए निर्देशों की अवहेलना करने के आदी हैं। दोनों का सितंबर का वेतन रोकते हुए तीन दिन में स्पष्टीकरण तलब किया है।
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-बिसंडा के लेखाकार से भी मांगा स्पष्टीकरण
-मनरेगा मजदूरी में लेटलतीफी पर सीडीओ की कार्रवाई