अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। बुंदेलखंड में हुई कम बारिश (अवर्षण) से सूखे के बादल मंडराने लगे हैं। खरीफ की फसल हाथ से जाती देख किसानों के चेहरों की हवाइयां उड़ने लगी हैं। इसे भांपते हुए राज्य सरकार के निर्देश पर प्रदेश के कृषि निदेशक ने बुंदेलखंड के सभी सातों जनपदों के जिलाधिकारियों को पत्र जारी कर फसलों को हुए नुकसान का क्लेम (बीमा) देने के लिए 15 दिन के अंदर गांववार सर्वे करके बीमा कंपनी को रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं। 50 प्रतिशत से कम पैदावार की आशंका पर किसानों को फौरी तौर पर 25 प्रतिशत तक आंशिक क्षतिपूर्ति (बीमा क्लेम) देने के निर्देश दिए हैं।
शुरूआत में मानसून ठीकठाक रहने के बाद अब पिछले महीने से गड़बड़ा गया है। पूरे बुंदेलखंड में औसत बारिश अब तक नहीं हुई। अब आगे बारिश की आशंका भी क्षीण नजर आ रही है। इसी बीच प्रदेश के कृषि निदेशक सोराज सिंह ने सोमवार को बुंदेलखंड के सभी सातों जिलों बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा, जालौन और झांसी व ललितपुर के जिलाधिकारियों को जारी किए पत्र में कहा है कि खरीफ 2017 में बुंदेलखंड के सभी जिलों में अवर्षण से फसलों खासकर उर्द व तिल को नुकसान पहुंचने की सूचना शासन को मिली है। इस पर शासन ने बुंदेलखंड में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को तत्काल आंशिक क्षतिपूर्ति दिए जाने की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
अधिसूचित फसलों की पैदावार 50 प्रतिशत से कम होने की स्थिति में तात्कालिक सहायता के रूप में 25 प्रतिशत तक अधिकतम आंशिक क्षतिपूर्ति बीमा कंपनी देती है। कृषि निदेशक ने कहा है कि राजस्व, कृषि विभाग और बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों की संयुक्त समिति बनाकर ग्राम पंचायतवार 15 दिन के अंदर फसलों का सर्वेक्षण कराकर क्षति का आंकलन बीमा कंपनी को भेजा जाए ताकि कंपनी 30 दिन के अंदर किसानों को आंशिक क्षतिपूर्ति दे सके।
-बुंदेलखंड में अवर्षण पर शासन ने शुरू की कार्रवाई
-प्रधानमंत्री फसल बीमा से मिलेगी आंशिक क्षतिपूर्ति
-कृषि निदेशक ने सातों जिलाधिकारियों को जारी किया पत्र