बुंदेलखंड में भूमि संरक्षण के प्रति कृषि विभाग के अधिकारी कितने सजग हैं इसका जीता जागता प्रमाण यहां चेकडेमों के निर्माण और भूमि संरक्षण संबंधी अन्य कार्यों के लिए सरकार से मिले बजट की अनदेखी से मिलता है।
भूमि संरक्षण विभाग पांच करोड़ से ज्यादा की राशि दबाए बैठा है। खर्च न होने की स्थिति में मार्च माह में यह बजट प्रदेश सरकार को वापस चला जाएगा। हाल ही में सांसद भैरों प्रसाद मिश्र भी भूमि संरक्षण विभाग के कार्यों पर नाराजगी जताकर चुके हैं। उनका कहना है कि इसके कार्यों की जांच सीबीआई से कराई जाएगी।
चित्रकूटधाम मंडल के चारों जनपदों में भूमि संरक्षण संबंधी कामों के लिए चालू वित्तीय वर्ष में 11.06 करोड़ रुपये दिए गए थे। नौ माह बीत गए और भूमि संरक्षण विभाग लगभग आधी राशि दबाए बैठा है। इसे खर्च नहीं किया गया। सबसे ज्यादा लापरवाही इस विभाग ने चित्रकूट में की है। यहां भूमि संरक्षण की तीनों इकाइयों ने एक धेला खर्च नहीं किया।
तीनों इकाइयों को 1.56 करोड़ से ज्यादा रकम मिली है। इनमें प्रथम इकाई को 59 लाख, द्वितीय इकाई को 49 लाख और भूमि संरक्षण अधिकारी चित्रकूट को 47.60 लाख रुपये मिले थे लेकिन तीनों इकाइयों ने धेला भर काम नहीं कराया। इसी तरह बांदा में भूमि संरक्षण की प्रथम इकाई ने 85 लाख में मात्र छह लाख (8 प्रतिशत) खर्च किए हैं।
द्वितीय इकाई ने 86 लाख में मात्र 19 लाख (23 प्रतिशत) और राष्ट्रीय जलागम इकाई ने एक करोड़ एक लाख में सिर्फ 3.80 लाख (4 फीसदी) ही बजट खर्च किया। पूरे जनपद में तीनों इकाइयों को कुल 2.74 करोड़ रुपये मिले थे। इसमें मात्र 30.29 लाख रुपये (11 प्रतिशत) ही खर्च हुआ है।
हमीरपुर और महोबा जनपदों की स्थिति बांदा और चित्रकूट से कुछ बेहतर है। हमीरपुर मेें तीनों इकाइयों को 3.42 करोड़ रुपये मिले थे। इसमें 2.61 करोड़ से ज्यादा रकम (76 प्रतिशत) खर्च की गई है। हमीरपुर की ईसी इकाई को 1.15 करोड़ रुपये मिले थे। इसमें 83.44 लाख रुपये (72 प्रतिशत) खर्च हुए हैं।
द्वितीय इकाई को 1.11 करोड़ रुपये का आवंटन हुआ था। इसमें 89.95 लाख रुपये (81 प्रतिशत) खर्च किया गया है। भूमि संरक्षण की राठ इकाई को 1.16 करोड़ रुपये मिले। यहां 88.28 लाख (76 प्रतिशत) खर्च होना बताया गया है।
महोबा में 3.34 करोड़ रुपये का आवंटन हुआ। 2.79 करोड़ रुपये (83 प्रतिशत) खर्च हुए। उप कृषि निदेशक भूमि संरक्षण कार्यालय ने 2.20 लाख लेकर 19 हजार रुपये (9 प्रतिशत) खर्च किए। भूमि संरक्षण अधिकारी महोबा ने 45.60 लाख और भूमि संरक्षण अधिकारी कुलपहाड़ ने 1.65 करोड़ रुपये लेकर पूरा बजट (शत-प्रतिशत) खर्च कर दिया।
अलबत्ता भूमि संरक्षण अधिकारी चराखारी ने 1.21 करोड़ में सिर्फ 68.22 लाख (56 प्रतिशत) खर्च किए हैं। उपरोक्त इकाइयों को यह बजट नाबार्ड, एनएमएसए और बुंदेलखंड की विशेष चेकडेमों के निर्माण की योजना के तहत दिए गए हैं।
चारों जनपदों को कुल 11.06 करोड़ रुपये से ज्यादा दिए गए। इसमें खर्च मात्र 5.71 करोड़ (51.61 प्रतिशत) हुए हैं यानि 5.35 करोड़ रुपये भूमि संरक्षण विभाग दबाए बैठा है। अब वित्तीय वर्ष खत्म होने में तीन माह से भी कम बचे हैं। ऐसे में यह बजट वापस जाने के आसार हैं।