बबेरू/कमासिन। रास्ते के विवाद में निषाद और यादव बिरादरी के बीच करीब नौ माह से चल रहा विवाद खत्म नहीं हो पा रहा। दो दर्जन से ज्यादा निषाद परिवार गांव के बाहर खुले आसमान तले घास-पूस और पॉलिथीन की झुग्गी झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं। अब यह प्रकरण हाईकोर्ट तक पहुंच गया है।
बबेरू तहसील और कमासिन थाना क्षेत्र के घोंषण गांव निवासी कृष्ण पाल, रामबाबू, अशोक कुमार, श्रीपाल आदि निषाद बिरादरी के ग्रामीणों ने जिलाधिकारी सहित उच्चाधिकारियों को भेजी आठ पृष्ठीय अर्जी में कहा कि लगभग 28 परिवार गांव के बाहर बागै नदी किनारे खुले आसमान तले घास-पूस की झोपड़ी बनाकर पिछले वर्ष सितंबर से डेरा डाले हैं।
उन्हें बेघर कर दिया गया है। उनकी बस्ती तक रास्ता नहीं बनवाया गया, जबकि गांव के अन्य इलाकों में भूमिधरी और खेतों में सड़क बना दी गई। आरोप लगाया कि उनकी भूमिधरी और तीन खेतों में रास्ता बनाकर डामरीकरण करा दिया गया। क्योटन पुरवा की सड़क पर मिट्टी और सिंचाई के पानी से दलदल हो गया है। इसी से उन्हें निकलना पड़ रहा है। कोई वाहन नहीं जा पा रहा।
शिकायतकर्ताओं ने स्थानीय अधिकारियों, लेखपाल, ग्राम प्रधान आदि पर न्याय न करने का आरोप लगाते हुए अपनी अर्जी में पूरा विस्तृत ब्योरा दिया है। कहा कि उच्च न्यायालय ने फरवरी माह में जिलाधिकारी को रोड बनवाने के लिए तीन माह का समय दिया था, लेकिन अब तक रोड नहीं बनी। सड़क बनने की झूठी सूचना दे दी गई।
उधर, इस बारे में आरोपी पक्ष के विजय किशोर यादव का कहना है कि निषाद परिवार के लोग उसकी जमीन पर मकान बनाकर रहते हैं। प्रशासन के कहने पर अपनी भूमिधरी वाले खेत के बीच से रास्ता भी दे दिया है। अब उसे परेशान करने के लिए पक्का रास्ता बनाने की मांग कर रहे हैं। कहा कि जिस जगह यह परिवार रह रहे हैं उसे अपने नाम कराना चाहते हैं। उधर, गांव के लेखपाल जयंत सिंह ने बताया कि भूमिधरी पर रास्ता प्रशासन ने दिला दिया है।