अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। बारिश ने धान की फसल को सूखने से तो बचा लिया, लेकिन खैरा रोग का खतरा टला नहीं है। परेशान किसान राय लेने के लिए कृषि विशेषज्ञों के चक्कर लगा रहे हैं। सब्सिडी पर मिलने वाली जिंक खाद भी इस बार नहीं है। किसानों को बाजार से महंगे दामों पर खरीदना पड़ रहा है।
इस बार करीब 70 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई हुई है। काफी दिनों से पानी न बरसने से फसल सूखने की कगार पर थी, लेकिन हाल ही में हुई बारिश ने फसल की रंगत लौटा दी, लेकिन खैरा रोग का खतरा टला नहीं है। इससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है। खैरा रोग का प्रमुख लक्षण धान की पत्तियों पर कत्थई रंग के धब्बे पड़ना है।
पहले चरण में खेत के एक कोने में दिखने वाले धब्बे देखते ही देखते पूरी फसल को गिरफ्त में ले लेते हैं। कृषि अधिकारियों के मुताबिक जिंक की कमी से खैरा रोग का प्रकोप होता है। इस साल ब्लाक के सरकारी बीज भंडारों में जिंक नहीं है। कृषि विशेषज्ञ डॉ. वीके सिंह ने बताया कि यूरिया के साथ जिंक सल्फेट मिलाकर छिड़काव करने से तीन से पांच दिन में धान के पौधे स्वस्थ हो जाएंगे।
बताया कि एक खेत में बार-बार एक ही फसल नहीं करनी चाहिए। ऐसा करने से जिंक की कमी हो जाती है। धान वाले खेत में उड़द या अरहर की खेती करने से जिंक की कमी दूर हो जाती है। गौरतलब है कि कृषि विभाग प्रति वर्ष किसानों को 90 फीसदी छूट पर जिंक मुहैया कराता था, लेकिन इस साल जिंक का टोटा है। मजबूरी में किसान प्राइवेट दुकानों से महंगे दामों पर जिंक खरीद रहे हैं।
धान की फसल को खैरा रोग का खतरा
सूख रही फसल को बारिश से मिली संजीवनी
जिले में 70 हजार हेक्टेयर में रोपा गया है धान