फोटो - 04 जंगल में गड्ढे खोदते वन कर्मी। स्त्रोत : विभाग
करतल। बुंदेलखंड में भीषण गर्मी के कारण पन्ना बाघ अभयारण्य में वन्यजीवों के लिए विशेष जल प्रबंधन शुरू किया गया है। तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने से वन्यजीवों को पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। यह व्यवस्था वर्षों से चली आ रही है और हर साल इसे पुख्ता किया जाता है।
अभयारण्य में 200 से अधिक तश्तरीनुमा गड्ढे बनाए गए हैं। इनकी निगरानी जिओ-टैगिंग तकनीक से की जाती है और टैंकरों से नियमित रूप से पानी भरा जाता है। क्षेत्र निदेशक बृजेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि गर्मी में वन्यजीव प्रबंधन चुनौतीपूर्ण होता है। पन्ना अभयारण्य ऐसी परिस्थितियों से निपटने का आदी है और इस वर्ष भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है। सभी जल स्रोतों को जिओ-टैग किया गया है और वायरलेस संचार से निगरानी होती है। नदियों में भी पानी का प्रवाह बना रहता है, और वाटर होल्स को समय पर भरा जाता है।
जल संरक्षण के अन्य उपाय
वन्यजीवों को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने के लिए जगह-जगह पानी के कुंड बनाए गए हैं। गर्मी में नदियों के पानी को जमा करने हेतु छोटे बांध भी निर्मित किए गए हैं। उप क्षेत्र निदेशक वीरेंद्र पटेल ने बताया कि पानी की कमी से जानवर रिहायशी इलाकों में जाते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए स्टॉप डैम बनाए गए हैं और भविष्य में और तालाब बनाने की योजना है।
फोटो - 04 जंगल में गड्ढे खोदते वन कर्मी। स्त्रोत : विभाग