बांदा। आम तौर पर बजट का रोना रोकर पूरा साल बिताने वाले कई विभागों ने वित्तीय वर्ष के आखिरी दिन पौने तीन अरब रुपये से ज्यादा खर्च कर दिए। देर शाम तक कोषागार में बिल दाखिल और मंजूर होते रहे। सबसे ज्यादा बजट पीडब्ल्यूडी, जिला पंचायत राज, समाज कल्याण और स्थानीय निकायों ने खपाया है। उधर, प्रदेश सरकार ने भी आखिरी दिन करीब डेढ़ करोड़ रुपये का बजट जारी किया।
तमाम विभाग अपना बजट पूरे साल खर्च नहीं कर पाए। अनेकों विकास कार्य और योजनाएं बजट के अभाव में प्रभावित रहीं, लेकिन वित्तीय वर्ष के आखिरी बेला में इन विभागों में पैसे की भरमार हो गई। बिल बनाकर कोषागार में जमा कर दिए गए। इन्हें तुरत-फुरत मंजूरी भी मिल गई।
मुख्य कोषाधिकारी दिनेश बाबू ने बताया कि 31 मार्च की शाम 7 बजे तक विभिन्न सरकारी कार्यालयों से करीब 3 अरब रुपये के बिल प्राप्त हुए। जिनमें 2.80 अरब के बिलों को स्वीकृति प्रदान कर संबंधित विभागों के खातों में पैसा भेज दिया गया।
उधर, सरकार ने उसी दिन कई विभागों को करीब डेढ़ करोड़ रुपये का बजट भी जारी किया है। इसके अलावा रोडवेज, सिंचाई सहित करीब एक दर्जन विभागों में संचालित विकास कार्यो व योजनाओं का बजट सीधे विभाग के खाते में भेजा जाता है। इसलिए इसकी जानकारी नहीं हो पाती है।