बांदा। विधायक निधि से कराए जाने वाले विकास कार्यों पर भी जीएसटी लगेगी। इसके लिए प्रदेश सरकार अलग से बजट देगी। बुंदेलखंड के सभी 19 विधान सभा क्षेत्रों के लिए जीएसटी के लिए 40-40 लाख रुपये दिए जाएंगे। इस वित्तीय वर्ष में अब तक निधियों से हुए खर्च का टैक्स भरने के लिए प्रदेश सरकार ने मुख्य विकास अधिकारियों से निधियों के खर्च ब्योरा मांगा है, ताकि जीएसटी के लिए बजट जारी किया जा सके।
जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) लगभग सभी लेनदेन पर लागू है। अब विधायकों को हर वर्ष मिलने वाली डेढ़ करोड़ रुपये की विधायक निधि भी इससे अछूती नहीं रही। प्रदेश सरकार के शासनादेश में कहा गया है कि विधानसभा सदस्य और विधानपरिषद सदस्य को अपने निर्वाचन क्षेत्र में विधायक निधि से कराए गए कार्यों पर जीएसटी अदा करने के लिए 40 लाख रुपये प्रति विधायक मंजूर किया गया है।
इस वित्तीय वर्ष में इसके लिए कुल 2 अरब एक करोड़ 20 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इसमें विधानसभा के 404 सदस्यों के लिए एक अरब 61 करोड़ 60 लाख रुपये और विधान परिषद के 99 सदस्यों के लिए 39 करोड़ 60 लाख रुपये दिए जाएंगे।
प्रदेश के ग्राम्य विकास आयुक्त नागेंद्र प्रसाद सिंह ने मंगलवार (13 नवंबर) को सभी मुख्य विकास अधिकारियों को जारी किए पत्र में कहा है कि चालू वर्ष 2018-19 में विधायक निधि से प्रथम और द्वितीय तिमाही में हुए खर्च का ब्योरा उपलब्ध कराएं, ताकि प्रत्येक विधायक को उनकी निधि में जीएसटी के लिए आवश्यक धनराशि जारी की जा सके।
बुंदेलखंड के सभी 19 विधानसभा क्षेत्रों के विधायकों को चालू वर्ष 2018-19 में विधायक निधि से खर्च किए गए धन पर जीएसटी अदायगी के लिए 40-40 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इन क्षेत्रों में बांदा जिले की बांदा सदर, नरैनी, बबेरू और तिंदवारी क्षेत्र चित्रकूट में चित्रकूट सदर (कर्वी) और मानिकपुर क्षेत्र, महोबा में महोबा सदर और चरखारी, हमीरपुर में हमीरपुर सदर और राठ, जालौन जिले में उरई सदर, कालपी व माधौगढ़, झांसी में झांसी नगर, बबीना, मऊरानीपुर व गरौंठा और ललितपुर जनपद में ललितपुर सदर तथा महरौली विधान सभा क्षेत्र के विधायक शामिल हैं। इन सभी विधायकों को 40 लाख रुपये प्रति के हिसाब से 7 करोड़ 60 लाख रुपये दिए जाएंगे।
सात माह में मात्र 68 लाख हुए खर्च
बांदा। चित्रकूटधाम मंडल के बांदा जिले में चार विधायकों और चार विधानपरिषद सदस्यों ने वर्ष 2018-19 में पहली अप्रैल से अक्तूबर तक (सात माह में) मात्र 68 लाख 25 हजार रुपये ही खर्च किए हैं, जबकि सभी को शासन से इस वर्ष पौने चार करोड़ रुपये आवंटित हुए हैं। 2 करोड़ 46 लाख 10 हजार रुपये अभी निधियों के खातों में पड़े हैं।
विधायक/एमएलसी की विधायक निधियों की ताजा स्थिति (लाख रुपये में)
विधायक प्राप्त निधि खर्च अवशेष
प्रकाश द्विवेदी (बांदा) 75.00 26.29 48.71
बृजेश प्रजापति (तिंदवारी) 75.00 1.00 74.00
राजकरन कबीर (नरैनी) 75.00 15.00 60.00
चंद्रपाल कुशवाहा (बबेरू) 75.00 25.96 49.04
नसीमुद्दीन सिद्दीकी 75.00 69.90 5.10
सुरेश कुमार त्रिपाठी 00 00 08.00
रमेश मिश्रा 00 00 00
आशीष पटेल 1.25 00 1.25
योग 375 68.25 246.10
पिछले वर्ष डेढ़ करोड़ नहीं खर्च कर पाए माननीय
बांदा। पिछले वित्तीय वर्ष 2017-18 में जिले के विधायकों ने अपनी निधियों का डेढ़ करोड़ से ज्यादा रुपया खर्च नहीं किया। सभी को निधि से डेढ़-डेढ़ करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे। शत-प्रतिशत राशि कोई माननीय खर्च नहीं कर पाया। विधायकों में निधि खर्च करने में विधायक प्रकाश द्विवेदी अव्वल रहे।
उन्होंने एक करोड़ 40 लाख 28 हजार रुपये खर्च किए थे, मात्र 9.74 लाख रुपये शेष रह गए। सबसे ज्यादा 39 लाख 4 हजार रुपये विधायक बृजेश प्रजापति के शेष रहे। उन्होंने एक करोड़ 10 लाख 96 हजार रुपये खर्च किए। विधायक राजकरन कबीर ने एक करोड़ 37 लाख 20 हजार खर्च कर दिए। 12 लाख 90 हजार रुपये नहीं खर्च हो पाए। विधायक चंद्रपाल कुशवाहा ने एक करोड़ 19 लाख 10 हजार रुपये खर्च किए।
30 लाख 90 हजार रुपये शेष रह गए। विधान परिषद सदस्य नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने एक करोड़ 12 लाख 90 हजार खर्च किए। 37 लाख 10 हजार खर्च नहीं हो पाए। इसमें 65 लाख रुपये किसी बाहरी जनपद को आवंटित हुए। एमएलसी सुरेश कुमार त्रिपाठी 3 लाख 50 हजार और एमएलसी रमेश मिश्रा 25 लाख 52 हजार रुपये खर्च करने में पीछे रहे।