बांदा। चित्रकूटधाम मंडल के स्वयं सहायता समूहों को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत आत्मनिर्भर बनाने में बैंक रोड़ा बने हैं। चालू वित्तीय वर्ष में मंडल के चारों जिलों से 2152 आवेदन बैंकों को भेजे गए थे। इनमें 476 ही स्वीकृत हुए।
1676 समूहों के आवेदन बैंकों में लंबित हैं। इस कारण इनसे जुड़ीं 18,436 महिलाओं को रोजगार नहीं मिल पा रहा। इस रवैए पर प्रदेश के संयुक्त मिशन निदेशक ने असंतोष जताते हुए मंडल के उपायुक्तों से रिपोर्ट तलब की है।
चित्रकूटधाम मंडल में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए चारों जिलों में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत करीब 20 हजार स्वयं सहायता समूह चल रहे हैं। इन्हें विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने के लिए बैंकों के माध्यम से पांच से 20 लाख रुपये तक की कैश क्रेडिट लिमिट (सीसीएल) बनवाकर ऋण दिलाया जाता है।
चालू वित्तीय वर्ष में मंडल के चारों जिलों से 2152 स्वयं सहायता समूहों के आवेदन विभिन्न बैंकों को भेजे गए थे, लेकिन बैंकों ने समूहों को ऋण देने में दिलचस्पी नहीं ली। 1676 आवेदन बैंकों ने ठंडे बस्ते में डाल रखे हैं। प्रदेश के संयुक्त मिशन निदेशक मथुरा प्रसाद मिश्रा ने असंतोष जताते हुए जिलों के उपायुक्त (स्वत: रोजगार) से ऋण प्रकरणों की रिपोर्ट तलब की है। कहा कि शासन स्तर पर बैंकों के महाप्रबंधकों से साथ बैठक करके प्रकरणों का निस्तारण कराया जाएगा।
बैंकों को भेजे ऋण आवेदनों की स्थिति
जिला आवेदन स्वीकृत लंबित
बांदा 580 152 428
चित्रकूट 539 94 445
महोबा 583 178 405
हमीरपुर 450 54 398
योग 2152 476 1676
10 हजार महिलाओं को मिला रोजगार
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत मंडल में 17 हजार से अधिक समूह सक्रिय हैं। इनके एक हजार से अधिक स्वयं सहायता समूह अचार, मुरब्बा, बच्चों की यूनिफार्म सिलाई, जैविक खाद, पीपीई किट, मास्क, सैनिटाइजर, दलिया, सौर ऊर्जा लैंप, एलईडी बल्व, दुग्ध उत्पादन, बकरी पालन आदि कार्य कर रहे हैं। इससे 10 हजार से अधिक ग्रामीण महिलाएं स्व: रोजगार से जुड़कर आत्मनिर्भर बनी हैं।
प्रवासी महिलाओं के लिए वरदान बने समूह
मंडल में स्वयं सहायता समूह द्वारा संचालित कुटीर उद्योग और छोटे व्यवसाय प्रवासी महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रहे हैं। एलआरएम उपायुक्त कृष्ण करुणाकरन पांडेय के अनुसार बांदा में 700, महोबा में 400, चित्रकूट में 500, हमीरपुर में 300 प्रवासी महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जोड़कर रोजगार दिया गया है।