बांदा। पशुओं की प्यास बुझाने के लिए तालाब भरने के लिए 8 मई से चलाई जाने वाले नहर नहीं चली। तालाब जस के तस सूखे पड़े हैं। उधर, बरियारपुर बांध से ओवरफ्लो होकर बह रहा पानी नहर में बर्बाद हो रहा है। सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता का कहना है कि नहर की मरम्मत का कार्य चल रहा है। इस कारण डीएम ने नहर चलाने पर रोक लगा दी है।
गंगऊ और बरियारपुर बांधों में पानी की स्थिति डेड स्टोर है। तलहटी पर जो भी पानी है, वह पशुओं के लिए तालाब भरने के लिए आरक्षित है। सिंचाई विभाग को मई में बांधों के इस पानी से नहर चलाकर तालाब भरना था। 8 मई से नहर चलाना प्रस्तावित था। इसके लिए सात मई को गंगऊ बांध के फाटक खोलकर वहां उपलब्ध पानी केन नदी के जरिये बरियारपुर बांध ले आया गया।
उधर, ऐन मौके पर नहर संचालन रोक देने पर बरियारपुर का नहर फाटक नहीं खोला गया। गंगऊ बांध से आए पानी से बरियारपुर बांध उफना गया। सैकड़ों क्यूसिक पानी नहर में बह रहा है। यह पानी पनगरा नहर तक पहुंच गया है। बांध के अवर अभियंता भीखम सिंह ने बताया कि अतर्रा ब्रांच की नहर में जिला पंचायत द्वारा कुछ कार्य कराया जा रहा है। ठेकेदार ने फोन पर यह जानकारी दी थी। इसके अलावा डीएम ने अधिशासी अभियंता केन नहर प्रखंड तृतीय को निर्माण कार्य के चलते फिलहाल नहर न चलाने के निर्देश दिए हैं। अवर अभियंता ने बताया कि बरियारपुर से कुछ अतिरिक्त पानी नहर में आ गया है।
सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता नीरज कुमार का कहना है कि सिंचाई प्रखंड से 25 व केन नहर के जरिये 125 तालाब और पोखरों को भरा जाना है। आठ मई से नहर में 1270 क्यूसिक पानी छोड़ा जाना था, लेकिन नहरों में मरम्मत का काम चलने की वजह से डीएम ने फिलहाल नहर चलाने से रोक दिया है। जैसे ही निर्देश मिलेगा, पानी चालू कर दिया जाएगा। अधीक्षण अभियंता ने बताया कि बांध में एक हफ्ते नहर चलाने के लिए पानी उपलब्ध है।