अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में मजदूरों को काम के लाले हैं। रोजगार की तलाश में मजदूर परदेस पलायन कर रहे हैं। मनरेगा में रोजगार सृजन की सबसे खराब प्रगति बबेरू ब्लाक की है। वित्तीय वर्ष के करीब ढाई माह बीतने को है। कई गांवों में मनरेगा कार्यों की शुरुआत नहीं हो सकी।
योजना के तहत प्रत्येक जाबकार्ड धारक को 100 दिन काम दिए जाने की गारंटी होती है। वित्तीय वर्ष 2018-19 में हर माह करीब डेढ़ लाख मानव दिवस सृजित किए जाने हैं, लेकिन सचिवों व रोजगार सेवकों की लापरवाही से मानव दिवस सृजन की स्थिति बेहद खराब है। जिले के 1.56 लाख जाबकार्ड धारकों को काम की तलाश है।
तीन दिन पूर्व मुख्य विकास अधिकारी की समीक्षा बैठक में मानव सृजन की स्थिति सभी ब्लाकों में खराब मिली। इनमें बबेरू ब्लाक की प्रगति सबसे खराब है। यहां के बरौली आजम, मिलाथू, पंडरी, टोला कलां गांव में मनरेगा के कार्य ही नहीं शुरू हुए। थरथुआ, धनसौल गांव में सिर्फ दो-दो लोगों को काम मिला। सांड़ा में 805 व अरमार में 970 मानव दिवस का लक्ष्य था, लेकिन सांड़ा में प्रगति जीरो है और अरमार में महज तीन मानव दिवस सृजित हुए। ऐसे ही मझिला, पून, भदवारी, जलालपुर इत्यादि गांव में भी मनरेगा योजना के हाल हैं।
मनरेगा में मजदूरों को काम के लाले
डेढ़ लाख जॉबकार्ड धारकों को काम की तलाश
बबेरू ब्लाक मजदूरी देने में सबसे फिसड्डी