जिला अस्पताल के लैब मेें ब्लड की जांच करते लैब टेक्नीशियन।
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बांदा। मंडल मुख्यालय में फलफूल रहे प्राइवेट पैथालाजी के गोरखधंधे के लिए स्वास्थ्य विभाग के अफसर सीधे जिम्मेदार हैं। उनकी लापरवाही या फिर प्राइवेट पैथालाजियों से सांठगांठ का ही यह नतीजा है कि जिला अस्पताल में 16 लाख रुपये की कीमत वाली कंप्लीट ब्लड काउंट (सीबीसी) की मशीन पिछले चार सालों से बंद पड़ी है। इसके पैनल खराब बताए गए हैं। अस्पताल के प्रशासन को इसे दुरुस्त कराने में कोई दिलचस्पी नहीं है।जिला अस्पताल की क्षमता बढ़ाकर 300 बेड करने का काम चल रहा है लेकिन यहां उपलब्ध तमाम महत्वपूर्ण सुविधाआें पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी घोर लापरवाही पर आमादा है।
लखनऊ से चार साल पहले यहां टर्गा कंपनी की आई आधुनिक जांच मशीन बेकार पड़ी है। इस मशीन से सीबीसी जांच आसानी से और मात्र 10 मिनट में हो जाती है। जबकि अभी जिला अस्पताल के पैथालाजी में हीमोग्लोबिन, टीएलसी, डीएलसी, मलेरिया व ईएसआर की साधारण जांच हो रही हैं। प्लेटलेट्स की जांच स्लाइड से होती है। इसमें समय काफी लगता है। रोजाना यहां दो से तीन सौ मरीजों की जांच होती है। खराब पड़ी आधुनिक मशीन (फुली आटो एनालाइजर) को दुरुस्त कराने की अस्पताल प्रशासन को फुरसत ही नहीं है। हाल ही में सीएमएस का पद संभालने वाले डॉ. किशोरी लाल भी इस मामले में खामोश हैं। उनका जवाब है कि सीबीसी ही नहीं कई और मशीनें भी खराब हैं। उन्होंने कहा कि पैथालाजी प्रभारी डॉ. एसके वापजेई से खराब मशीनों की जानकारी मांगी गई है। इन्हें जल्द ठीक कराया जाएगा।