बांदा। मानसिक रोगी भी अब दिव्यांग माने जाएंगे। उन्हें भी 500 रुपये प्रतिमाह पेंशन मिलेगी। अन्य सुविधाएं भी दी जाएंगी। यह जानकारी राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण के सीईओ डॉ. सुनील पांडेय ने दी।
डीएम हीरालाल की पहल पर बुधवार को मेडिकल कालेज ऑडिटोरियम में आयोजित मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के आयोजित कार्यशाला में डॉ. पांडेय ने कहा कि हमारे देश में मानसिक रोग को अभिशाप की तरह देखा जाता है, जबकि कानून की अवधारणा है कि मानसिक स्वास्थ्य से जूझ रहे लोगों को समाज की मुख्य धारा में रखते हुए घर पर ही दवाइयों की मदद से उन्हें ठीक किया जाए।
उन्होंने कहा कि नए कानून के तहत हिस्टीरिया, मानसिक विकलांगता, मिर्गी, उदासी, गंभीर मानसिक रोग सहित कई मानसिक स्थितियों को दिव्यांगों की प्रमाणता दी गई है। इसलिए ऐसे रोगों का प्रमाणपत्र बनाया जाएगा और दिव्यांगों को मिलने वाली 500 रुपये प्रतिमाह पेंशन, बस और रेल में मुफ्त यात्रा जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए जीवन शैली में सुधार व योग अपनाने की सलाह दी।
मनोरोग चिकित्सक डॉ. सौरभ मिश्रा (बाराबंकी) ने अवसाद यानी डिप्रेशन के कारण और पहचान के बारे में बताया। कहा कि जरूरत पड़े तो इसकी दवाइयां एक से दो साल तक नियमित रूप से ले लेना चाहिए। मनोरोग चिकित्सक डॉ. एके मिश्रा ने बताया कि गंभीर अवसाद की स्थिति में कई लोग आत्महत्या की कोशिश करते हैं। ऐसी प्रवृत्ति को पहचानने और उसके उपचार के बारे में उन्होंने जानकारियां दीं। यह भी बताया कि वर्ष 2017 के एक्ट के अनुसार अब आत्महत्या अपराध नहीं बल्कि मानसिक तनाव के कारण उठाया गया कदम है। इसके लिए कोई सजा नहीं दी जा सकती।
मुख्य विकास अधिकारी हरिश्चंद्र वर्मा ने कहा कि मानसिक कमजोरी की शुरुआत ज्यादातर गर्भावस्था से होती है। कुपोषण पर खास ध्यान देना चाहिए। इस अवसर पर मानसिक रूप से दिव्यांग 10 लोगों को प्रमाणपत्र व फलाहार बांटे गए। कार्यशाला में मेडिकल कालेज प्राचार्य डॉ. मुकेश यादव, मनोरोग चिकित्सक डॉ. हरदयाल, साइकोलॉजिस्ट डॉ. रिजवाना हाशमी, डीपीएम कुशल यादव, डीसीपीएम नीरज सिंह, वर्कर पल्लवी सक्सेना, नरेंद्र कुमार मिश्रा, त्रिभुवन नाथ, कीर्ति प्रभा पाल, अनुपम त्रिपाठी, अशोक कुमार सहित एमओआईसी, आशा, एएनएम और काउंसलर भी मौजूद रहे। योगाचार्य रमेशचंद्र राजपूत ने योग मुद्रा व प्राणायाम सिखाए।