बांदा। बांधों के तलहटी में एकत्र पानी से चलाई गई मुख्य केन नहर बंद हो गई। सिंचाई विभाग का दावा है कि एक हफ्ते तक चली नहर से 219 तालाब भरे गए हैं, 75 तालाब नहीं भर पाए। उधर, तीनों बांध ‘डेड स्टोर’ हो गए हैं। खरीफ की फसल को बांधों से पानी तभी मिलेगा जब बारिश होगी।
सिंचाई विभाग ने बांधों से 14 मई को मुख्य केन नहर में पानी छोड़ा था। विभागीय आंकड़ों में नहर में सात दिन पानी चला, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि शुरू के चार दिनों में नहर खाली रही। पानी आया भी तो नाममात्र को। 18 से 20 मई तक ही पानी चला। बांधों का पानी खत्म हो जाने पर 25 मई को नहर संचालन बंद हो गया।
इस अवधि में सिंचाई विभाग के आंकड़ों के मुताबिक प्रतिदिन 1272 क्यूसिक पानी नहर में छोड़ा गया। सिंचाई विभाग आंकड़ों की माने तो केन नहर के इर्दगिर्द बसे गांवों के 219 तालाब भरे गए हैं। इनमें लघु डाल नहर ने 50, सिंचाई प्रखंड तृतीय ने 28 और केन कैनाल ने 151 तालाबों में पानी भरा है।
औगासी पंप कैनाल से बबेरू क्षेत्र के 34 तालाब भरे जाना बताया गया है। बिसंडा ब्लाक में 66, बड़ोखर खुर्द ब्लाक में 16, महुआ ब्लाक में 51 और नरैनी ब्लाक में 21, तिंदवारी ब्लाक में 3, तालाब केन कैनाल प्रखंड द्वारा भरे गए हैं। सिंचाई खंड तृतीय ने नरैनी ब्लाक में 28 तालाब भरे है। जबकि सिंचाई विभाग ने पूर्व में जिला प्रशासन को 294 तालाबों में पानी न होने की सूची दी थी। यानि कि 75 तालाबों में अभी भी धूल उड़ रही है।
केन नहर प्रखंड के अधिशासी अभियंता अरविंद कुमार पांडेय का कहना है कि 95 फीसदी खाली तालाबों को भर दिया गया है। गंगऊ, रनगवां और बरियारपुर बांधों में अब पानी नहीं बचा है। अब बारिश में ही बांधों में पानी आएगा। तभी नहरों में पानी मुहैया कराया जाएगा।