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बुंदेलखंड में बनेंगे सात गोवंश वन्य विहार

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बांदा। बुंदेलखंड की सबसे ज्वलंत अन्ना पशु समस्या से निपटने के लिए प्रदेश सरकार आठ करोड़ की लागत से सातों जिलों में एक-एक गोवंश वन्य विहार की स्थापना कर रही है। पिछले वर्षों में भी प्रदेश सरकार ने लगभग 40 करोड़ रुपये खर्च किए थे। इसके बाद भी इस समस्या से निजात नहीं मिल रही है।
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पूरा बुंदेलखंड अन्ना पशु समस्या से त्रस्त है। इनके आतंक ने पहले से ही दैवी आपदाओं की मार झेल रहे किसानों की हालत और खराब कर दी है। विधानसभा से लेकर संसद तक यह समस्या गूंज चुकी है।

प्रदेश सरकार ने पिछले वर्षों में अन्ना पशुओं के लिए 40 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च करके गांवों में अन्ना पशु आश्रय केंद्र और गोशालाएं आदि खुलवाईं, लेकिन इनके संचालन की स्थायी व्यवस्था न होने से यह फ्लाप हो गईं। चारा पानी न मिलने से गोशालाओं में बंद गायों की हो रही मौतों पर ग्रामीणों ने अन्ना गायों का रिहा कर दिया। अब यह फिर खेत, खलिहान और सड़कों पर आ गई हैं।
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अब प्रदेश सरकार बुंदेलखंड के सातों जिलों में ‘गोवंश वन्य विहार स्थल’ निर्माण करा रही है। इसके लिए 8 करोड़ 40 लाख स्वीकृत किए गए हैं। सातों जिलों एक-एक गोवंश वन्य विहार बनेगा। इसमें एक हेक्टेयर में 3500 वर्ग फुट के चार टिनशेड, चरही, कटिया मशीन, ट्यूबवेल, 5000 लीटर की दो पानी की टंकी आदि होंगी।

प्रत्येक वन्य विहार में 500 पशुओं के रहने की क्षमता होगी। प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव सुधीर एम बोबडे़ ने डीएम व जिला पशु चिकित्सा को भेजे शासनादेश में भूमि का चयन कर जल्द वन्य विहार स्थल बनवाने को कहा है।

करोड़ों रुपये खर्च, समस्या जस की तस
बुंदेलखंड में अन्ना पशुओं से राहत के लिए प्रदेश सरकार कई योजनाएं लागू करके इन पर करोड़ों रुपये खर्च कर चुकी है। पर अन्ना प्रथा में कोई कमी नहीं आई। वर्ष 2018-19 में अस्थायी गोवंश स्थलों पर 11.50 करोड़, सात स्थायी पशु आश्रय स्थलों पर 2.10 करोड़, सात गो संरक्षण केंद्रों पर 6.35 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं।

इसके अलावा शहरी क्षेत्रों में नगर निकाय द्वारा 15 करोड़ के लागत के तीन कान्हा पशु आश्रय स्थल व अस्थाई पशु संरक्षण केंद्र खोले गए। ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत स्तर से भी गोवंश संरक्षण केंद्र खुले। सांसद निधियों से 2.10 करोड़ और विधायक निधि से 60 लाख लागत से गोशालाएं बनाई गईं। जिला पंचायतों ने भी अस्थाई गोशालाएं बनवाईं।
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