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टिकट और चुनाव में खपाएंगे खदानों की कमाई

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बांदा। बालू खदानों से की जा रही कमाई का एक बड़ा हिस्सा लोकसभा चुनाव में खपेगा। बालू की यह रकम टिकट से लेकर चुनाव प्रचार तक में खर्च होगी। खदानों की कमाई खपाने के लिए सभी प्रमुख दल के नेता शामिल हैं।
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बुंदेलखंड में बालू का कारोबार काफी पुराना है। लेकिन इसे अंधाधुंध कमाई की पहचान बसपा सरकार ने दिलाई। बसपा सरकार में खनिज मंत्रालय बांदा के ही नेताजी के पास था। खदानों के ठेके के साथ ही सिंडीकेट प्रथा भी चालू की गई। दोनों की अलग-अलग कमाई करोड़ों में है। खदानों का ठेका घोषित रूप से और सिंडीकेट की कमान अघोषित रूप से सौंपी जाती है।

बालू की अंधाधुंध कमाई से कई नेताओं के मुंह में पानी आ गया। वह राजनीति के साथ बालू के धंधे में शामिल हो गए। दूसरी तरफ कई बालू कारोबारी खदानों की कमाई के दम पर विभिन्न दलों के नेता बन गए। मुट्ठी खोलकर दी रकम से टिकट हथियाया और दिल खोलकर चुनाव प्रचार में खत्म किया। कई बालू कारोबारियों और माफियाओं की किस्मत ने साथ दिया और वह चुनाव जीतकर माननीय बन गए।
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बालू की कमाई से राजनीति का धंधा बसपा सरकार के बाद से दिन-ब-दिन परवान चढ़ा। सपा सरकार में भी यह धंधा तेजी से फलाफूला। कैडर और ईमानदारी की दुहाई का ढिंढोरा पीटने वाली भाजपा सत्ता में आने के बाद बालू और बदनाम हुई। पिछली सरकारों के पदचिह्नों पर चलते हुए भाजपा नेता भी बालू की कमाई में जुट गए।

अब मौजूदा लोकसभा चुनाव में भी बालू की कमाई सिर चढ़कर बोलेगी। भाजपा, कांग्रेस, सपा आदि दलों के कई नेता बालू के बलबूते चुनाव लड़ने को बेताब हैं। टिकट के लिए जुगत भिड़ा रहे हैं। पार्टी फंड में डोनेशन या किसी और रास्ते से खर्च करने को तैयार हैं। टिकट मिला तो प्रचार में भी बालू की कमाई रंग दिखाएगी। खदानों और सिंडीकेट की कमाई कर रहे नेताओं के नाम चर्चाओं में अक्सर लोगों की जुबान पर आ ही जाते हैं।
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लोकसभा चुनाव में सक्रिय हुए बालू कारोबारी
बालू बना चुकी है माफियाओं को ‘माननीय’
अमर उजाला ब्यूरो
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