बांदा। गांव की सरकार जैसे ही 25 दिसंबर को खत्म हो गई, वैसे ही गांवों के विकास कार्यों पर विराम लगना भी शुरू हो गया है। पूरे चित्रकूटधाम मंडल में विकास खंडों के गांवों में प्रतिनिधित्व न होने से विकास कार्य भी ठप होने लगे हैं। इस दौरान मंडल के चारों जनपदों में लगभग 1200 विकास कार्य बंद हो चुके हैं। इनमें लगे रहे तकरीबन 15 हजार मजदूर बेरोजगार भी हो गए हैं। अब ऐसे में अधिकांश मजदूर महानगरों का रुख करने की तैयारी में हैं।
25 दिसंबर 2020 को ग्राम पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो गया और प्रदेश की योगी सरकार ने नए कार्यकाल के लिए चुनाव कराने का एलान कर दिया। इसके अलावा गांव की सरकार की कमान ग्राम प्रधानों के हाथाें से छीनकर अधिकारियों को सौंप दी गई। पंचायतों से सत्ता जाने का सीधा असर गांव स्तर पर चल रहे विकास कार्यों पर भी पड़ा है। सरकारी आंकड़े इसके गवाह हैं। सबसे ज्यादा 320 विकास कार्य बांदा जिले के गांवों में बंद हुए हैं। महोबा जिले में 300, चित्रकूट जिले में 296 और हमीरपुर जिले में 272 कामों में विराम लग गया है। यह सारे काम मनरेगा से चल रहे थे।
आंकड़ों के मुताबिक, चारों जिलों में 14,753 मजदूरों के हाथों से काम छिन गया है। मंडल में मनरेगा जाबकार्डधारकों की संख्या 8 लाख से अधिक है। इसमें क्रियाशील मजदूर 4.92 लाख हैं। प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के पूर्व तक मंडल के चारों जिलों में मनरेगा मजदूरों की संख्या 78,621 थी, जबकि 2582 काम चल रहे थे। अब मजदूरों की संख्या घटकर 63,868 और विकास कार्य 1394 रह गए हैं। 1188 काम बंद हुए और 14,753 मजदूर बेरोजगार हो गए हैं। ग्राम विकास से जुड़े अधिकारियों का पूरा ध्यान पंचायत चुनाव की तैयारियों और मिनी ग्राम सचिवालय व सामुदायिक शौचालयों के निर्माण में लगा है। उन पर इन कार्यों के लिए दबाव भी है।
कार्यकाल खत्म होने से पहले कार्य और मजदूरों का ब्योरा---
जनपद ग्राम कार्य मजदूर
बांदा 471 780 24,088
चित्रकूट 335 630 25,900
हमीरपुर 330 600 15,753
महोबा 273 572 12,880
योग 1409 2,582 78,621
अब मनरेगा कार्यों और मजदूरों की स्थिति---
जनपद ग्राम कार्य मजदूर
बांदा 471 460 19,088
चित्रकूट 335 334 20,925
हमीरपुर 330 328 12,753
महोबा 273 272 11,101
योग 1409 1394 63,867
मंडल में क्रियाशील मजदूर 4.92 लाख
मंडल के जनपद बांदा में जॉबकार्डधारकों की संख्या 2.10 लाख है, लेकिन इनमें क्रियाशील मजदूर 1.52 लाख है। चित्रकूट में जॉबकार्डधारकों की संख्या 1.65 लाख है। इनमें क्रियाशील मजदूर 1.35 लाख है। हमीरपुर में जॉबकार्डधारकों की संख्या 1.50 लाख है। इनमें क्रियाशील मजदूरों की संख्या 1.05 लाख है। महोबा में जाबकार्डधारकों की संख्या 1.40 लाख है। इनमें क्रियाशील मजदूरों की संख्या 1 लाख है।
खेती किसानी में जुटा है मजदूर
उपायुक्त मनरेगा राघवेंद्र तिवारी का कहना है कि मजदूर खेती किसानी में लगा हुआ है। इससे कुछ निर्माण कार्य बंद हैं। खंड विकास अधिकारियों को पत्र भेजकर मनरेगा के तहत ग्राम पंचायतों में तीन से चार विकास कार्य और ज्यादा से ज्यादा मानव दिवस सृजित किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रत्येक मजदूर को साल में कम से कम 100 दिन का काम दिया जाना चाहिए।
35 हजार मजदूरों को सिर्फ 20 दिन काम
मनरेगा गाइडलाइन के मुताबिक, प्रत्येक मजदूर को साल में कम से कम 100 दिन मजदूरी मिलनी चाहिए, लेकिन मंडल में 35 हजार मजदूरों को 20 दिन का भी काम नहीं मिला। अधिकारियों का तर्क है कि लॉकडाउन के समय जो मजदूर आए थे वह 10 से 20 दिन काम करने के बाद वापस महानगरों को चले गए। इससे उनके काम का प्रतिशत कम है।
मजदूरों को गांव में ही मिले काम
मुख्य विकास अधिकारियों और मनरेगा उपायुक्तों को निर्देश दिए गए हैं कि गांवों में मनरेगा कार्य चलते रहेंगे। बेवजह कार्य बंद हुए तो संबंधित के विरूद्ध कठोर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। शासन की मंशा के अनुरूप मजदूरों को गांव में ही काम मिलना चाहिए।
-रमेशचंद्र पांडेय, संयुक्त विकास आयुक्त (जेडीसी), चित्रकूटधाम मंडल
जालौन में विकास कार्य नहीं रुके
उरई (जालौन)। डीपीआरओ अभय यादव ने बताया कि जिले में गांव की सरकार खत्म होते ही शासन के निर्देश पर सभी ग्रामपंचायतों में एडीओ को प्रशासक नियुक्त कर दिया था, जिससे जिले के सभी विकास कार्य तेज गति से चल रहे है। आंकड़ों के अनुसार, जिले की 575 ग्राम पंचायतों में लगभग नाली, खंड़जा, शौचालय सहित 6735 संचालित है, जिसमें नियमित रूप से कार्य चल रहा है और समय समय पर अधिकारी इन विकास कार्यों का निरीक्षण करते है।