बांदा। शहर की खेल परंपरा और युवाओं के भविष्य की रक्षा के लिए नया कदम उठाया गया है। ऐतिहासिक राइफल क्लब मैदान को व्यावसायिक गतिविधियों के लिए नीलाम करने या उपयोग में लाने के बांदा विकास प्राधिकरण के प्रस्ताव के खिलाफ एक व्यापक हस्ताक्षर अभियान शुरू किया है। इस अभियान का उद्देश्य उत्तर प्रदेश सरकार तक बांदा की जनता की आवाज पहुंचाना और मैदान को बचाने के लिए जनसमर्थन जुटाना है।
शहर की समृद्ध खेल परंपरा का केंद्र रहा राइफल क्लब मैदान केवल एक खाली जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य, खिलाड़ियों की नर्सरी और शहर की खुली सांस के रूप में जाना जाता है। 1902 से पुलिस परेड और विभिन्न खेलों के लिए उपयोग में आने वाले इस मैदान पर मेजर ध्यानचंद, सुरेश रैना और प्रवीण कुमार जैसे कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी खेल चुके हैं। बांदा शहर में यह एकमात्र ऐसा प्रमुख खुला मैदान बचा है जहां सुबह-शाम युवा दौड़ने, क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी और कबड्डी जैसे खेलों का अभ्यास करते हैं।
यह मैदान उन हजारों युवाओं के लिए शारीरिक परीक्षा की तैयारी का एकमात्र सहारा है जो भारतीय सेना (अग्निवीर), पुलिस और पैरामिलिट्री में जाने का सपना देखते हैं। ऐसे में इस मैदान के एक हिस्से को व्यावसायिक उपयोग के लिए नीलाम करने या निजी प्रदर्शनी/व्यापारिक गतिविधियों के लिए देने की बीडीए की योजना चिंता का विषय बनी हुई है। खेल विशेषज्ञों और नागरिकों का मानना है कि खेल के मैदान का व्यावसायिक उपयोग युवा पीढ़ी के साथ अन्याय है और यह माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों का भी उल्लंघन है। बुंदेलखंड इंसाफ सेना ने तत्काल कार्रवाई की मांग की है।