बांदा। बीती 27 मार्च को जिले के मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) के खाते से 1.68 करोड़ रुपये निकालने की साजिश भले नाकाम हो गई लेकिन इस केस ने एक बड़े साइबर नेटवर्क की परतें खोल दी हैं। पुलिस ने कार्रवाई तेज करते हुए 12 मोबाइल नंबर और छह ईमेल आईडी फ्रीज कर दिया है। जांच की दिशा अब उन प्रभावशाली नामों की ओर मुड़ गई है जिनकी भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है।
जांच टीम के अधिकारियों का मानना है कि ठगों ने फर्जी पहचान और कागजी प्रक्रिया का सहारा लेकर सरकारी सिस्टम में सेंध लगाने की कोशिश की। बैंक स्तर पर सतर्कता ने करोड़ों की रकम बचा ली, लेकिन इस वारदात ने सुरक्षा व्यवस्था की कमजोर कड़ियों को उजागर कर दिया।
साइबर सेल संदिग्ध नंबरों और ईमेल आईडी से जुड़े आईपी एड्रेस, लोकेशन और ट्रांजेक्शन पैटर्न की बारीकी से जांच कर रही है। शुरुआती पड़ताल में कनेक्शन कई शहरों और राज्यों तक जाता दिख रहा है, जिससे संगठित गिरोह होने के संकेत मिल रहे हैं। जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि कुछ प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आए हैं। हालांकि पुलिस का कहना है कि ठोस सबूत मिलने के बाद ही किसी का नाम सार्वजनिक किया जाएगा।
फिलहाल सबूत जुटाने और कड़ियों को जोड़ने पर जोर है। टीमें संदिग्धों की तलाश में लगातार दबिश दे रही हैं। अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज का कहना है कि तकनीकी साक्ष्य मजबूत हो रहे हैं और जल्द ही इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा।