अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। करीब सात वर्षों के इंतजार के बाद बांदा व हमीरपुर के 1279 स्कूलों को चूल्हों से छुटकारा मिलेगा। यहां मिड-डे मील के लिए गैस कनेक्शन को शासन ने 43.76 लाख रुपये स्वीकृत किए हैं। दो माह के अंदर गैस कनेक्शन उपलब्ध कराकर शासन को रिपोर्ट देनी होगी।
बांदा जनपद में कुल 2107 परिषदीय स्कूलों में मिड-डे मील योजना लागू है। इनमें 1203 विद्यालयों में वर्ष 2010 में गैस कनेक्शन उपलब्ध करा दिए गए थे। हमीरपुर जिले में 1034 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय में मिड-डे मील बन रहा है। यहां 659 स्कूलों में गैस कनेक्शन है। शासन ने अब दोनों जिलों में बचे स्कूलों को भी गैस कनेक्शन उपलब्ध कराने के लिए धनराशि जारी कर दी है। बांदा जिले में 904 स्कूलों में गैस सिलेंडर के लिए 24,44,416 रुपये और चूल्हे के लिए 13.56 लाख रुपये स्वीकृत हुए हैं।
हमीरपुर में 375 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में गैस कनेक्शन के लिए 10.14 लाख और चूल्हे के लिए 5.62 लाख रुपये मिले हैं। प्रति स्कूल 2704 रुपये कनेक्शन में और 1500 रुपये चूल्हे में खर्च किए जाएंगे। मध्याह्न भोजन योजना प्राधिकरण की ओर से उपलब्ध कराए गए इस बजट में एक ही परिसर में संचालित प्राथमिक व जूनियर स्कूलों को प्राथमिकता दी जाएगी। शासन के विशेष सचिव देवेंद्र प्रताप सिंह ने जिलाधिकारियों को इस बाबत पत्र जारी किया है। कहा है कि यह बजट दूसरे मद में खर्च न किया जाए। बीएसए आपूर्ति अधिकारी से मिलकर गैस एजेंसी से कनेक्शन कराएंगे। दो माह के अंदर यह खरीद प्रक्रिया पूरी करनी है। इस बाबत मिड-डे मील योजना के जिला प्रभारी भाष्कर आसवानी ने बताया कि प्रधानाध्यापकों से सप्ताह भर के अंदर मांग पत्र मांगा गया है। सारी प्रक्रिया जल्द ही पूरी कर ली जाएगी।
बांदा। प्राथमिक व जूनियर स्कूलों में मिडडे मील के लिए शासन विद्यालयों को कन्वर्जन कास्ट भेजता है। प्राथमिक स्तर पर 4.80 और जूनियर में प्रति बच्चा 6.70 रुपये निर्धारित है। बीएसए वीपी सिंह ने बताया कि प्रधानाध्यापकों को इसी धनराशि से तेल, मसाला के साथ ईंधन (गैस) की व्यवस्था करनी होगी। हालांकि प्रधानाध्यापक इससे सहमत नहीं है। उनका कहना है कि कन्वर्जन कास्ट बच्चों की 60 फीसदी उपस्थिति के हिसाब दी जाती है। एक माह में दो सिलेंडर खप जाते हैं। ऐसे में सारी धनराशि इसी में चली जाएगी।
-हमीरपुर को 15.76 और बांदा को 38 लाख मिले