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माफिया और अपराधी पीडब्ल्यूडी में नहीं पाएंगे ठेके

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बांदा। पीडब्ल्यूडी में ठेकेदारों की माफियागीरी और वर्चस्व पर खतरा मंडराने लगा है। प्रदेश सरकार द्वारा शासनादेश पर अगर ईमानदारी से अमल हुआ तो पीडब्ल्यूडी में माफिया, अपराधी, उनके गुर्गे अथवा परिजन ठेके नहीं पाएंगे। ठेकेदार आपस में मिलजुल कर कोई ‘खेल’ नहीं कर पाएंगे। ठेका हासिल कर लेने के बाद भी इन बातों का पता चला तो ठेका निरस्त कर दिया जाएगा।
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प्रदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव सदाकांत ने इस बाबत एक विस्तृत शासनादेश 8 जून को जारी किया है। नए शासनादेश के मुताबिक पीडब्ल्यूडी के टेंडर और ठेकों में माफिया गतिविधियों पर लगाम लगाकर टेंडर की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और मानक व गुणवत्ता के मुताबिक किया जाएगा।

माफिया समूहों पर भी रोक लगाई जाएगी। अपर मुख्य सचिव ने पीडब्ल्यूडी के प्रमुख अभियंता समेत सभी मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को जारी शासनादेश में कहा है कि सड़क, सेतु, भवन, विद्युत, यांत्रिक, निर्माण कार्य आदि का ठेका किसी भी अपराधी व्यक्ति को नहीं दिया जाएगा।
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ऐसा व्यक्ति जिसका अपराधिक इतिहास हो या जिसके विरुद्ध अपराधिक मुकदमे दर्ज हों या माफिया गतिविधियों, गैंगेस्टर एवं गुंडाराज गतिविधियों में संलग्न हों। ऐसे व्यक्तियों सहित ब्लैक लिस्टेड लोग भी ठेका प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकेंगे।

काली सूची और डिबार किए गए ठेकेदारों की सूची विभागीय वेबसाइट पर डालकर सार्वजनिक की जाए। शासन ने कहा है कि अक्सर ठेकेदार ब्लैक लिस्टेड या डिबार हो जाने पर अपने परिवारजनों के नाम से या फर्म/कंपनी का नाम बदलकर दूसरा रजिस्ट्रेशन कराकर काम करने लगते हैं।

ऐसा कोई भी व्यक्ति अथवा उसका सगा संबंधी पंजीकरण या किसी फर्म के पार्टनर अथवा निदेशक की हैसियत से रजिस्ट्रेशन को आवेदन करता है तो उस पर विचार नहीं किया जाएगा। ठेकेदारों के दांवपेंच पर भी शासन ने लगाम कसी है। कहा है कि ठेकेदार ग्रुप बनाकर टेंडर डाल देते हैं।

नतीजे में कंप्टीशन वाली दरों का लाभ विभाग को नहीं मिल पाता। ठेकेदार आपस में मिल लेते हैं। शासन ने निविदा समिति के सदस्यों को निर्देश दिया है कि इससे सतर्क रहें और टेंडरों की जांच करें। पूलिंग की आशंका होने पर टेंडर स्वीकृतिकर्ता अधिकारी से निर्देश प्राप्त करें।

अभियंताओं के ‘खेल’ पर भी शासन ने शिकंजा कसा है। अपर मुख्य सचिव ने कहा है कि अक्सर अभियंताओं द्वारा जानबूझकर एक काम को छोटे-छोटे कई कामों में बांटकर कम लागत के अनुबंध बना दिए जाते हैं। इससे एक ही काम में बहुत से ठेकेदार लग जाने से गुणवत्ता प्रभावित होती है।

शासन ने आदेश दिया है कि सभी मूल कार्यों के लिए सामान्यत: ‘एक कार्य, एक टेंडर’ का सिद्धांत अपनाया जाए। पीडब्ल्यूडी के पंजीकृत ठेकेदार को ही विभाग के कार्यों को करने तथा ठेका प्राप्त करने की अनुमति दी जाए। अपर मुख्य सचिव ने सख्त निर्देश दिया है कि इन सभी निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाए।
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-परिजनों या गुर्गों के रजिस्ट्रेशन पर भी रोक
-ठेकेदारों की जुगलबंदी पर भी लगाम
अमर उजाला ब्यूरो

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