बांदा। रोडवेज का फंडा यह है कि मियां की जूती, मियां का सिर। यानी हादसे का शिकार होने पर आर्थिक मदद यात्रियों की ही जेब से ही ली जाती है। हरेक यात्री से किराए के साथ सात फीसदी यात्री सुविधा टैक्स वसूला जाता है, जबकि सुविधाएं नदारद हैं। हादसा होने पर मुआवजा भी इसी मद से दिया जाता है। चित्रकूटधाम मंडल में रोडवेज औसतन हर माह लगभग 20 करोड़ रुपये किराया वसूलता है। यानी एक करोड़ 40 लाख रुपये यह टैक्स हर माह वसूला जाता है।
यात्री शायद इस मुगालते में हो कि रोडवेज उन्हें यात्रा के दौरान मिलने वाली सुविधाएं सरकारी पैसे से दे रहा है। इसी तरह हादसा होने पर मुआवजा या आर्थिक मदद निगम या सरकार के बजट से दी जाती है, पर ऐसा नहीं है। परिवहन निगम यात्रियों से किराए के साथ यात्री सुविधा टैक्स वसूलता है। इसके मानक यह बताए गए हैं कि 40 किलोमीटर तक की यात्रा पर यह टैक्स नहीं लगता। इससे अधिक 200 किलोमीटर तक 90 पैसे और 200 किलोमीटर से अधिक लंबी दूरी की यात्रा में 1.50 रुपये प्रति यात्री सुविधा टैक्स लिया जाता है।
चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों में परिवहन निगम लगभग 400 बसों के बेडे़ से हर माह औसतन 20 करोड़ रुपये यात्रियों से किराए के रूप में कमाता है। 7 फीसदी की दर से इसमें 2 लाख 85 हजार रुपये यात्री सुविधा टैक्स के होते हैं। इसी टैक्स से यात्रियों को सुविधाएं और क्लेम का भुगतान होता है।
मंडल में एक करोड़ 40 लाख रुपये रोज सिर्फ सुविधा टैक्स वसूलने वाला परिवहन निगम यात्रियों की सुविधा पर इसका एक चौथाई भी खर्च नहीं करता। बसें खटारा हैं। बस अड्डाें पर सफाई, पेयजल आदि जैसे बुनियादी सुविधाएं भी नदारद हैं। निगम को क्लेम के रूप में यदा कदा ही भुगतान करना होता है। दो दिन पूर्व तिंदवारी क्षेत्र के सैमरी गांव के पास हुए रोडवेज बस हादसे में मृतक 9 यात्रियों को 50-50 हजार रुपये और घायलों को 20 हजार व पांच हजार रुपये की मदद इसी मद से दी गई है।