फोटो-21-बलरामपुर के उतरौला में शायरी सुनाते शायर।-स्रोत: आयोजक
उतरौला। मोहम्मद यूसुफ उस्मानी इंटर कॉलेज में शुक्रवार की रात एक शाम मुनव्वर राना के नाम अखिल भारतीय मुशायरा एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें देश के विभिन्न शहरों से आए शायर व कवियों ने अपने कलाम पेश कर श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा। कार्यक्रम में साहित्य और अदब की खूबसूरत छटा देखने को मिली।
मुख्य अतिथि नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि मुनव्वर राना की शायरी हर वर्ग के दिलों तक पहुंची। विशेष रूप से मां पर लिखी गई उनकी शायरी अद्वितीय और अमर है। मुशायरे में शुजा उतरौलवी ने शेर पढ़ा कि-बेटे नेमत हैं, बेटियां रहमत, कोई छोटा-बड़ा नहीं होता। वहीं बिलाल सहारनपुरी ने फरमाया कि- खानदानी आदमी धोखा नहीं देता कभी, दोस्ती करते हुए औकात भी देखा करो। लखनऊ से आए मुन्नवर राना के बेटे तबरेज राना ने मौजूदा हालात पर शेर पढ़ा कि इंसान लड़ रहे थे यूं मजहब के नाम पर, बाहर था इतना शोर कि हम घर में आ गए। बलिया की कवयित्री प्रतिभा यादव ने- गिला न होठों पर शिकायत लेकर, आपके शहर में आई हूं मोहब्बत लेकर, सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी। इंदौर के कवि महेंद्र मधुर ने सुनाया कि- तुम्हारे पास आने के सुअवसर कम नहीं आए, अभी तक हम इलाहाबाद के संगम नहीं आए। अलीगढ़ की शायरा मुमताज नसीम ने- घर से निकली तो मैंने सोचा न था, इतनी मुश्किल मुलाकात हो जाएगी, सुनाकर श्रोताओं का दिल जीत लिया। इसके अलावा सबीना अदीब, यूसुफ उतरौलवी, सबा बलरामपुरी और हाशिम फिरोजाबादी ने भी अपनी रचनाओं से महफिल को यादगार बना दिया।
कार्यक्रम का आयोजन सुमैया राना ने किया, जबकि संचालन नदीम फारूक ने किया। इस अवसर पर पूर्व विधायक अनवर महमूद, डॉ. एहसान, केजी श्रीवास्तव, ओंकार पटेल, पप्पू फूलपुर, कफील अब्बास, रहीम खान, डॉ. अताउल्लाह एवं डॉ. रफीउल्लाह सहित अन्य साहित्य प्रेमी मौजूद रहे।