बलरामपुर। देवीपाटन मंडल के बहुचर्चित स्वास्थ्य घोटाले की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। विजिलेंस टीम को संयुक्त जिला अस्पताल में वर्ष 2018 के दौरान हुए करीब 1.40 करोड़ रुपये के भुगतान से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम आवश्यक अभिलेख जांच एजेंसी को सौंप चुकी है। माना जा रहा है कि इन दस्तावेजों के परीक्षण के बाद विवेचना में तेजी आएगी और आरोपियों की गिरफ्तारी व अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
सूत्रों के मुताबिक विजिलेंस ने संयुक्त जिला अस्पताल और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय से भुगतान से संबंधित बिल-वाउचर, निविदा अभिलेख, खरीद प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज, प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृतियां, स्टॉक रजिस्टर, उपयोगिता प्रमाणपत्र समेत अन्य रिकॉर्ड मांगे थे। इसके बाद अस्पताल के रिकॉर्ड रूम से कई वर्षों पुरानी फाइलें निकलवाकर उनका मिलान किया गया और जांच एजेंसी को आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध करा दिए गए।
यह वही मामला है, जिसमें आरोप है कि 24 और 25 मई 2018 को तत्कालीन अधिकारियों की मिलीभगत से निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना कुछ फर्मों को करीब 1.40 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया था। नए मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) के कार्यभार संभालने से पहले हुए इस भुगतान पर सवाल उठे थे। बाद में शिकायत शासन स्तर तक पहुंची, जिसके बाद पहले एसआईटी और फिर विजिलेंस ने जांच अपने हाथ में ली।
अब जांच एजेंसी उपलब्ध दस्तावेजों का मिलान पहले दर्ज बयानों, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों से करेगी। आवश्यकता पड़ने पर बैंक खातों, भुगतान की इलेक्ट्रॉनिक ट्रेल और संबंधित फर्मों के लेन-देन की भी जांच की जा सकती है। रिकॉर्ड में जिन अधिकारियों, कर्मचारियों या आपूर्तिकर्ताओं की भूमिका सामने आएगी, उनसे दोबारा पूछताछ की संभावना जताई जा रही है।
इससे पहले विजिलेंस टीम जिले में कई दिनों तक डेरा डालकर सीएमओ कार्यालय और संयुक्त जिला अस्पताल में जांच कर चुकी है। इस दौरान बड़ी संख्या में दस्तावेज जुटाए गए थे और कई कर्मचारियों से पूछताछ भी की गई थी। अब नए अभिलेख मिलने के बाद जांच एजेंसी पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
गौरतलब है कि स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कई मामलों में विजिलेंस पहले ही एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई कर रही है। पूर्व विधायक समेत कई पूर्व अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ जांच जारी है। अदालत से राहत नहीं मिलने और विजिलेंस की सक्रियता बढ़ने के बाद इस प्रकरण में कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब सभी की निगाहें विजिलेंस की अगली रिपोर्ट और संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं।