बलरामपुर। स्वास्थ्य घोटालों की गहराई से जांच के लिए मंगलवार को पांच सदस्यीय विजिलेंस टीम जिले में पहुंची। टीम सीधे सीएमओ कार्यालय पहुंची और वहां तैनात लिपिकों, चीफ फार्मासिस्ट सहित अन्य कर्मचारियों से पूछताछ कर अभिलेखीय साक्ष्य जुटाए। इसके अलावा संयुक्त जिला चिकित्सालय में हुए कथित घोटाले की भी देर शाम तक जांच की गई।
टीम ने कुछ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की जांच की भी तैयारी शुरू कर दी है। तीन स्वास्थ्य केंद्र अधीक्षकों को सीएमओ कार्यालय बुलाकर पूछताछ की गई। विजिलेंस टीम बुधवार को भी जिले में रुककर आगे की पड़ताल करेगी।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2017-18 से 2021-22 के बीच स्वास्थ्य विभाग में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं। इनमें पयागपुर (बहराइच) के पूर्व सपा विधायक मुकेश श्रीवास्तव, उनके भाई अजय, पिता, पत्नी और अन्य रिश्तेदारों पर आरोप शामिल हैं। आरोप है कि अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में मेंटेनेंस कार्य, दवाओं व उपकरणों की खरीद तथा सेवा प्रदाता कंपनियों के माध्यम से फर्जी कर्मचारियों की नियुक्ति कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।
विजिलेंस जांच में पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव, उनके भाई सहित जिले में तैनात रहे दो सीएमओ, सीएमएस, जेई और आधा दर्जन लिपिकों को दोषी पाया जा चुका है। पिछले दिनों इनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई थी, जिसके बाद से सभी पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।
मंगलवार को जांच अधिकारी विजय यादव के नेतृत्व में टीम ने सीएमओ कार्यालय में पूछताछ कर कई दस्तावेज एकत्र किए। सूत्रों के अनुसार, कर्मचारियों से घोटाले से जुड़ी संतोषजनक जानकारी नहीं मिल सकी।
संयुक्त जिला अस्पताल के दस्तावेजों की जांच
विजिलेंस टीम शाम को मेडिकल कॉलेज के अधीन संयुक्त जिला चिकित्सालय पहुंची, जहां 24 और 25 मई 2018 को कथित तौर पर 1.40 करोड़ रुपये का भुगतान तत्कालीन अधिकारियों की मिलीभगत से मुकेश श्रीवास्तव और उनके भाई अजय श्रीवास्तव की फर्मों को किए जाने का मामला सामने आया था। इसकी शिकायत तत्कालीन सीएमएस डॉ. राजेश मोहन गुप्त ने शासन से की थी, जिसे जांच में शामिल किया गया है।
टीम ने सीएमएस डॉ. राजकुमार से भी जानकारी ली। वहीं, लिपिक कोमल श्रीवास्तव, जो इस मामले में पहले से ही जांच के दायरे में है, उस समय छुट्टी पर था।
सरकारी आवासों की वीडियोग्राफी
जांच के दौरान विजिलेंस टीम ने सीएमओ कार्यालय परिसर स्थित आवासीय परिसर में जाकर तीन चिकित्सीय आवासों की वीडियोग्राफी कराई। ये आवास पूर्व में मुख्य आरोपी के भाई द्वारा कब्जाए गए बताए जाते हैं।
इसके साथ ही परिसर में कराए गए मरम्मत कार्यों का भी रिकॉर्ड जुटाया गया। टीम बुधवार को भी कई अन्य कर्मचारियों के बयान दर्ज कर सकती है।