फोटो-22-बलरामपुर के जिला मेमोरियल अस्पताल के ओपीडी में बैठे मरीज ।-संवाद
बलरामपुर। मेडिकल कॉलेज के अधीन संचालित संयुक्त जिला चिकित्सालय में हड्डी रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के कारण हड्डी रोग के मरीजों का इलाज मुश्किल है। मुफ्त इलाज की आस में मरीज चिकित्सालय आते तो हैं, लेकिन निराश होकर वापस लौटना पड़ता है।
संयुक्त जिला चिकित्सालय में पूर्व में हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. केके बरनवाल की तैनाती थी, उनके चले जाने के बाद चिकित्सक का पद रिक्त है। संयुक्त जिला चिकित्सालय में हड्डी रोग से संबंधित प्रतिदिन 100 से 120 मरीज इलाज कराने आते हैं। चिकित्सक न होने से मरीज इलाज के लिए भटक रहे हैं। बुधवार को ओपीडी में बैठे राधेश्याम ने बताया कि उनके बेटे के हाथ में सूजन है, चिकित्सक को दिखाने आए थे। रघवापुर की शालिनी ने बताया कि उनके जोड़ों में दर्द है, इलाज कराने आई थी। यहां पर चिकित्सक ही नहीं है। अब जिला मेमोरियल अस्पताल जा रही हूं। इसी तरह मोहन, शरीफ, असलम व मोहित भी पर्चा बनवाकर ओपीडी में बैठे हुए थे। उन्हें कोई यह बताने वाला नहीं है कि चिकित्सक नहीं है।
निजी चिकित्सक उठाते हैं फायदा
संयुक्त जिला चिकित्सालय में विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के कारण मरीज मजबूर होकर निजी चिकित्सकों का सहारा लेते हैं। निजी चिकित्सक एक्सरे जांच महंगी दवाएं लिखकर मरीजों का फायदा उठा रहे हैं। नंदनगर के बाबूलाल ने बताया कि उनका दायां हाथ टूट गया था, एक निजी चिकित्सक से आठ हजार रुपये में इलाज कराया है।