बलरामपुर। ठंड बढ़ने पर सीने में दर्द व हार्ट-अटैक से जुड़ी घटनाएं बढ़ जाती हैं। इसके बाद भी मरीजों के लिए जिला मेमोरियल चिकित्सालय में ईसीजी जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। इमरजेंसी पहुंचने वाले मरीजों को बाहर से ईसीजी करानी पड़ती है। निजी पैथोलॉजी मरीजों से एक ईसीजी के लिए 350 रुपये वसूलते हैं। रात में इमरजेंसी पड़ने पर ईसीजी का रेट 500 रुपये तक पहुंच जाता है।
सोमवार की दोपहर 12.30 बजे सीने में दर्द की शिकायत लेकर प्रमित कुमार जिला मेमोरियल अस्पताल पहुंचे। पैथोलॉजी के बाहर खड़े परिजनों ने बताया कि डॉक्टर ने ईसीजी लिखी है, लेकिन लैब में ईसीजी नहीं हो रही है। कर्मचारी ने बाहर से ईसीजी कराने की सलाह दी है, वहीं जा रहे हैं। अस्पताल के पर्चा काउंटर पर मरीजों की कतार लगी दिखी।
नगर के सिविल लाइन निवासी राजेश तेज सिरदर्द व पसीना आने की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचे। बीपी बढ़ा देकर डॉक्टर अजय पांडेय ने उन्हें ईसीजी कराने की सलाह दी। मरीज को निजी केंद्र पर ईसीजी कराने में 350 रुपये खर्च करने पड़े। डॉक्टर ने ईसीजी देखकर मरीज को लखनऊ रेफर कर दिया।
रविवार की शाम सड़क दुर्घटना में घायल गोरख प्रसाद का इलाज इमरजेंसी में चल रहा था। हालत बिगड़ने पर डॉक्टर ने ईसीजी कराने की सलाह दी। अपने मरीज की स्थिति जानने के लिए परिजनों ने बाहर से 400 रुपये खर्च करके ईसीजी कराई।
जिला मेमोरियल चिकित्सालय में प्रतिदिन औसतन 250 मरीजों की ओपीडी होती है। इसमें करीब दस मरीज उच्च रक्तचाप, सीने में दर्द व हार्ट अटैक के लक्षण वाले होते हैं। इन मरीजों को बाहर से ईसीजी करनी पड़ती है। ऐसे में प्रतिमाह 300 ईसीजी होने पर निजी पैथोलॉजी का धंधा एक लाख तक पहुंच जाता है।