बलरामपुर। बाढ़ प्रभावितों को शरण देने के लिए जिले में 12 करोड़ रुपये के दो बहुउद्देशीय शरणालय (मल्टी पर्पज शेल्टर) का निर्माण अभी शुरू नहीं हो सका है। पहले की तरह ही इस बार भी जुलाई माह से ही बाढ़ का संकट शुरू हो जाएगा। इसके लिए बजट जारी कराने की कवायद तेज हो गई है, लेकिन अभी तक बजट नहीं मिला है। ऐसे में एक बार फिर से राप्ती नदी की बाढ़ से प्रभावितों को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाने के प्रयास पर पानी फिर रहा है।
सदर व उतरौला तहसीलों में राप्ती नदी की बाढ़ से सबसे अधिक लोग प्रभावित होते हैं। एक एकड़ जमीन में आधुनिक संसाधनों से लैस दोनों तहसीलों में मल्टी पर्पज शेल्टर का निर्माण कराने का खाका तैयार किया गया था। एक शेल्टर के निर्माण पर छह करोड़ रुपये खर्च होगी। यहां एक हजार महिलाओं व पुरुषों को अलग-अलग ठहराने की व्यवस्था होती। दोनों तहसीलों में बाढ़ प्रभावित गांवों के पास भूमि की तलाश की गई थी, जहां आसानी से पहुंचने के लिए रास्ते की भी सुविधा है। सदर तहसील के शेखरपुर गांव में छह बीघे व उतरौला तहसील के नंदौरी गांव में सात बीघे जमीन की तलाश करके शेल्टर के नाम से हस्तांतरण करा लिया गया था।
-
350 गांवों में मचती है बाढ़ की तबाही
-सामान्य बारिश में भी राप्ती नदी के बाढ़ का कहर सदर, उतरौला व तुलसीपुर के कम से कम 85 गांवों पर टूटता है। अधिक बारिश होने पर 350 से अधिक गांवों में राप्ती नदी की बाढ़ भारी तबाही मचाती है। वर्ष 2022 में राप्ती नदी के बाढ़ ने खूब तबाही मचाई थी।
-
बजट मिलने पर शुरू होगा निर्माण
-सदर व उतरौला तहसील में मल्टी पर्पज शेल्टरों का निर्माण कराने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। अब इस परियोजना पर विशेष फोकस किया जा रहा है। निर्माण शुरू किए जाने का निर्देश विभाग को दिया है।
-अरविंद सिंह, जिलाधिकारी