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Balrampur News: जिसे लूटा, वही निकला अपना, मंच पर दिखा रिश्तों का दर्द

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नाटक ख्वाहिशें का मंचन करते कलाकार 
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लखनऊ। ज्यादा पाने की चाह इंसान को किस हद तक ले जा सकती है, नाटक ''ख्वाहिशें'' ने यही सवाल दर्शकों के सामने रखा। नाट्य संस्था आकांक्षा थिएटर आर्ट्स की ओर से मंगलवार को गोमतीनगर स्थित बौद्ध शोध संस्थान में इसका मंचन किया गया। यह नाटक संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के रिपर्टरी ग्रांट वर्ष 2026-27 के तहत पहली प्रस्तुति रहा।
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वरिष्ठ रंग निर्देशक और उप्र संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित प्रभात कुमार बोस के निर्देशन में मंचित नाटक में मार्था और उसकी मां गेस्ट हाउस चलाती हैं और लालच में मेहमानों की हत्या कर उनका पैसा लूटती हैं। एक दिन जॉन नाम का मुसाफिर गेस्ट हाउस में ठहरता है। मार्था उसे जहर देकर मार देती है, लेकिन उसका पासपोर्ट देखते ही मां को पता चलता है कि जॉन उसका खोया हुआ बेटा और मार्था का भाई है। इस सदमे में मां जीवन खत्म कर लेती है। मार्था की भूमिका में आरोही गुप्ता, मां की दिव्यजीत गुप्ता, जॉन की अंकुर सक्सेना और मारिया की भूमिका में मुस्कान सोनी की शानदार अदाकारी को दर्शकों ने खूब सराहा।

नाटक ख्वाहिशें का मंचन करते कलाकार 

नाटक ख्वाहिशें का मंचन करते कलाकार 

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