बलरामपुर। बोर्ड परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद भी सफलता के कई रास्ते खुले हैं। कई छात्र-छात्राएं अपेक्षित सफलता न मिलने से निराश हो जाते हैं। डीआईओएस मृदुला आनंद का कहना है कि यह अंत नहीं, बल्कि नए अवसरों की शुरुआत है। असफल या कम अंक पाने वाले विद्यार्थियों के लिए आगे बढ़ने के कई रास्ते मौजूद हैं, जिनके माध्यम से वे अपना शैक्षणिक वर्ष बचाते हुए भविष्य को नई दिशा दे सकते हैं।
यूपी बोर्ड की ओर से हर वर्ष कंपार्टमेंट (पूरक) परीक्षा का आयोजन किया जाता है। ऐसे विद्यार्थी जो एक या दो विषयों में पास नहीं हो सके हैं, वे निर्धारित समय पर आवेदन कर इस परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। जल्द ही यूपी बोर्ड तिथि तय करेगा। इस परीक्षा का उद्देश्य छात्रों को उसी वर्ष पास होने का अवसर देना है, ताकि उनका एक साल व्यर्थ न जाए। अधिकारियों के अनुसार पूरक परीक्षा में प्रश्नपत्र अपेक्षाकृत सरल होता है और पाठ्यक्रम भी सीमित रहता है, जिससे छात्रों को बेहतर प्रदर्शन का मौका मिलता है।
स्क्रूटनी और अंक सुधार की सुविधा
जो विद्यार्थी अपने प्राप्त अंकों से संतुष्ट नहीं हैं, उनके लिए उत्तरपुस्तिका की स्क्रूटनी (पुनर्मूल्यांकन) का विकल्प भी उपलब्ध है। कई बार मूल्यांकन में त्रुटि के कारण अंक कम आ जाते हैं, जिसे सुधारा जा सकता है। इसके अलावा कुछ मामलों में अंक सुधार परीक्षा के जरिए भी छात्र अपने प्रतिशत को बेहतर बना सकते हैं, जिससे आगे की पढ़ाई या प्रतियोगी परीक्षाओं में लाभ मिलता है।
हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा में प्रत्येक विषय में न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य है। यदि किसी छात्र के एक या दो विषयों में 33 प्रतिशत से कम अंक आते हैं, तो वह पूरक परीक्षा देकर पास हो सकता है। वहीं, दो से अधिक विषयों में असफल होने की स्थिति में छात्र को पुनः मुख्य परीक्षा देनी पड़ती है।
ओपन स्कूल और वैकल्पिक शिक्षा का सहारा
यदि कोई छात्र नियमित स्कूल में पढ़ाई जारी नहीं रखना चाहता, तो वह ओपन स्कूल प्रणाली के माध्यम से अपनी पढ़ाई पूरी कर सकता है। यह विकल्प उन छात्रों के लिए खास तौर पर उपयोगी है जो किसी कारणवश नियमित उपस्थिति नहीं दे पाते। इसके साथ ही आईटीआई, पॉलिटेक्निक, ग्राफिक डिजाइनिंग, फोटोग्राफी, कंप्यूटर कोर्स और डिजिटल मार्केटिंग जैसे स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम भी छात्रों को कम समय में रोजगारपरक प्रशिक्षण प्रदान करते हैं।
जिले का रिजल्ट एक नजर में
कक्षा - पंजीकृत - उपस्थित - उत्तीर्ण
हाईस्कूल - 20855 - 19852 - 17272
इंटरमीडिएट - 15309 - 14657 - 11798
सही विकल्प चुनने में करें सहयोग
परीक्षा परिणाम जीवन का अंतिम सत्य नहीं है। असफलता से सीख लेकर आगे बढ़ना ही सफलता की कुंजी है। जिला अभिभावक भी सजग रहें। बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें, बल्कि उनका मनोबल बढ़ाएं और सही विकल्प चुनने में सहयोग करें।
सर्वेश सिंह, सदस्य वित्त समिति मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय
कॅरिअर को दें नई दिशा
बोर्ड परीक्षा में अपेक्षित परिणाम न आने पर घबराने की बजाय उपलब्ध विकल्पों का सही उपयोग करना जरूरी है। मेहनत, सही मार्गदर्शन और सकारात्मक सोच के साथ छात्र न केवल अपनी पढ़ाई जारी रख सकते हैं, बल्कि अपने कॅरिअर को भी नई दिशा दे सकते हैं।
- मनिराम सिंह, पूर्व शिक्षाधिकारी