बलरामपुर। एमएलके महाविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन बृहस्पतिवार को हुआ। संगोष्ठी में देश के विभिन्न प्रांतों से आए शिक्षाविद, शोधार्थी और विशेषज्ञों ने जैव विविधता, नृजातीय वनस्पति विज्ञान एवं पर्यावरण संरक्षण विषय पर प्रकाश डाला।
राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. जेपी तिवारी, विभागाध्यक्ष डॉ. राजीव रंजन एवं आईक्यूएसी समन्वयक प्रो. एसपी मिश्र ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया। मुख्य अतिथि ने कहा कि नृजातीय वनस्पति विज्ञान स्थानीय समुदायों द्वारा सदियों से उपयोग किए जा रहे पौधों की पहचान, उपयोग और प्रबंधन से जुड़े पारंपरिक ज्ञान का वैज्ञानिक अध्ययन है। वर्तमान समय में इस ज्ञान के संरक्षण की विशेष आवश्यकता है। विभागाध्यक्ष ने कहा कि भारत में 45 हजार से अधिक पौधों की प्रजातियां और 700 से अधिक जनजातीय समुदाय हैं। इसी से नृजातीय वनस्पति विज्ञान, जैव विविधता और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण संगम बनता है। यह न केवल प्रजातियों के संरक्षण में सहायक है, बल्कि स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान को भावी पीढ़ियों तक सुरक्षित रखने का माध्यम भी है। इससे पहले तकनीकी सत्र में ऑनलाइन माध्यम से इलाहाबाद विश्वविद्यालय के डॉ. केवट संजय कुमार तथा मिजोरम विश्वविद्यालय के डॉ. अवधेश कुमार ने अपने विचार रखे।
आयोजन सचिव डॉ. शिव महेन्द्र सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। इसके बाद डॉ. वीर प्रताप सिंह ने दो दिवसीय संगोष्ठी की आख्या प्रस्तुत की। इस अवसर पर विभिन्न राज्यों से आए शिक्षाविद, शोधार्थी तथा छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।