फोटो-27- मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते कुलपति प्रो. रवि शंक
बलरामपुर। मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय में पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर शुक्रवार को ‘एकात्म मानव दर्शन की प्रासंगिकता’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम का आयोजन स्कूल ऑफ सोशल वर्क और स्कूल ऑफ पॉलिटिकल साइंस के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। इस दौरान पं. दीनदयाल उपाध्याय के जीवन, संघर्ष और सामाजिक योगदान पर आधारित डॉक्यूमेंट्री भी प्रदर्शित की गई।
मुख्य अतिथि समाजसेवी प्रो. एलके सिंह ने कहा कि एकात्म मानव दर्शन भारतीय चिंतन की महत्वपूर्ण वैचारिक धरोहर है। इसे केवल पढ़ने और चर्चा तक सीमित रखने के बजाय व्यवहार और सामाजिक जीवन में उतारने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पं. दीनदयाल उपाध्याय ने साम्राज्यवाद की नीतियों को नकारते हुए व्यक्ति, समाज, राष्ट्र और मानवता के समन्वित विकास की स्वदेशी दृष्टि प्रस्तुत की। मानव केंद्रित विकास की सोच के माध्यम से भारत स्वयं सशक्त होने के साथ विश्व कल्याण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. रवि शंकर सिंह ने कहा कि पूंजीवाद, साम्यवाद और समाजवाद के बीच पं. दीनदयाल उपाध्याय ने भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप एकात्म मानव दर्शन प्रस्तुत किया। इसका उद्देश्य व्यक्ति का समग्र विकास और समाज व राष्ट्र का कल्याण है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में ऐसे वैचारिक विषयों पर निरंतर संवाद विद्यार्थियों को भारतीय चिंतन परंपरा से जोड़ने का माध्यम है।
संगोष्ठी के बाद पं. दीनदयाल उपाध्याय के जीवन और योगदान पर आधारित डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर रामकृष्ण तिवारी, प्रो. बीपी सिंह, कुलसचिव परमानंद सिंह, डॉ. उपासना सिंह व डॉ. रमा मौर्या सहित तमाम शिक्षक, विद्यार्थी व कर्मचारी मौजूद रहे।