बलरामपुर। जिले में दो दिन से लगातार हो रही बारिश से गांवों से लेकर कस्बों तक जनजीवन प्रभावित हुआ है। बारिश के साथ चली तेज हवा से कई जगह पेड़ और छप्पर गिर गए। शहर, कस्बों और गांवों की सड़कों पर जलभराव होने से आवागमन में परेशानी हुई। कई रास्तों पर पानी भरने से दोपहिया वाहन चालकों को जोखिम उठाकर निकलना पड़ा। बारिश के कारण बाजारों में भी चहल-पहल कम रही। उधर, राप्ती का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोग सतर्क हो गए हैं। तेज हवा से धान और गन्ने की फसल गिरने से किसानों की चिंता भी बढ़ी है।
तुलसीपुर में बारिश का असर अधिक दिखाई दिया। थाना मोड़ से थाने तक जाने वाली सड़क पर पानी भर गया। तहसील परिसर भी जलभराव की चपेट में रहा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में पानी भरने से मरीजों और स्वास्थ्य कर्मियों को परेशानी हुई। पानी डॉक्टरों और कर्मचारियों के आवास तक पहुंच गया। सामान्य दिनों में करीब 750 मरीजों की ओपीडी वाले सीएचसी में शुक्रवार को केवल 60 मरीज पहुंचे। महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. सौम्या ने बताया कि पानी आवासीय परिसर तक पहुंचने से सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जीवों का खतरा बना हुआ है। गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचने में भी दिक्कत हो रही है।
गैसड़ी में मुख्य मार्ग पर पुलिस चौकी के पास पानी भर गया। सड़क के दोनों ओर ऊंची जमीन होने के कारण पानी बीच में जमा हो गया। स्थानीय निवासी दिलीप, राकेश और दुर्गेश ने बताया कि जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने से हर बारिश में समस्या होती है। राहगीरों को पानी के बीच से होकर निकलना पड़ता है।
महराजगंज तराई क्षेत्र में तेज हवा और बारिश से कंदैला-बदलपुर मार्ग पर पेड़ गिर गया। इससे कुछ समय के लिए आवागमन प्रभावित रहा। अमरहवा पूरेछीटन निवासी जनार्दन सिंह का छप्पर का मकान भी भरभराकर गिर गया। घर में रखा सामान मलबे में दबकर क्षतिग्रस्त हो गया। गनीमत रही कि परिवार के किसी सदस्य को चोट नहीं आई। लेखपाल पीयूष कुमार ने मौके पर पहुंचकर क्षति का आकलन किया।
ललिया क्षेत्र में तेज हवा से धान और गन्ने की फसल खेतों में गिर गई। किसान मनीष कुमार ने बताया कि करीब एक एकड़ में तैयार धान की फसल हवा से गिर गई है। बाबू यादव के अनुसार बालियां निकल रही धान की फसल को भी बारिश और हवा से नुकसान पहुंच रहा है। रेहरा बाजार, गैसड़ी और सादुल्लाहनगर के किसानों की भी चिंता बढ़ी है।
उधर, केंद्रीय जल आयोग के राप्ती फ्लड फोरकास्टिंग सिस्टम के अनुसार 24 सितंबर को राप्ती का जलस्तर 101.65 मीटर था, जो 25 सितंबर को बढ़कर 101.82 मीटर हो गया। चेतावनी स्तर 103.62 मीटर और खतरे का निशान 104.62 मीटर है। पूर्वानुमान के अनुसार 26 सितंबर को जलस्तर 101.99 मीटर तक पहुंच सकता है। हालांकि नदी अभी चेतावनी और खतरे के निशान दोनों से नीचे है। जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती गांवों के लोग नदी पर नजर रख रहे हैं।
लगातार बारिश से सूखने की कगार पर पहुंच रही धान की फसल को एक ओर पानी मिला है, वहीं तेज हवा से पककर तैयार फसल गिरने से नुकसान की आशंका बढ़ी है। गन्ने की फसल भी कई जगह गिर गई है।
जिलाधिकारी विपिन कुमार जैन ने बताया कि बारिश की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। लोगों से अनावश्यक घर से बाहर नहीं निकलने, नदी-नाले, तालाब और जलभराव वाले स्थानों से दूर रहने तथा वाहन धीमी गति से चलाने की अपील की गई है। अगले दो-तीन दिन बारिश, आंधी और बिजली कड़कने की संभावना है। फिलहाल जिले में बाढ़ जैसी स्थिति नहीं है। राप्ती के बढ़ते जलस्तर पर भी नजर रखी जा रही है।
फोटो-10- बलरामपुर रोडवेज बस डिपो परिसर में भरा बारिश का पानी। संवाद
फोटो-10- बलरामपुर रोडवेज बस डिपो परिसर में भरा बारिश का पानी। संवाद
फोटो-10- बलरामपुर रोडवेज बस डिपो परिसर में भरा बारिश का पानी। संवाद
फोटो-10- बलरामपुर रोडवेज बस डिपो परिसर में भरा बारिश का पानी। संवाद