फोटो-16- नगर स्थित जैन सभा भवन में कथावाचकों के साथ मौजूद जैन समाज के लोग। स्रोत जैन सभा
बलरामपुर। नगर के मेजर चौराहा के पास स्थित जैन सभा भवन में आठ सितंबर से जैन समाज का प्रमुख पर्यूषण पर्व श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया जा रहा है। 15 सितंबर तक चलने वाले पर्व में प्रतिदिन पूजा, स्वाध्याय, उपवास, प्रवचन और धार्मिक अनुष्ठान हो रहे हैं। पर्व में शामिल होने राजस्थान और मध्यप्रदेश से आए प्रवाचक श्रद्धालुओं को जैन धर्म के मूल सिद्धांतों की जानकारी देने के साथ भगवान महावीर के संदेशों पर चलने की सीख दे रहे हैं।
शुक्रवार को राजस्थान से आए प्रवाचक नरेश चंद्र जैन ने कहा कि जैन धर्म में अहिंसा को सर्वोच्च महत्व दिया गया है। अहिंसा केवल किसी जीव को शारीरिक कष्ट न पहुंचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि मन, वचन और कर्म से किसी के प्रति बुरा भाव न रखना भी इसका हिस्सा है। उन्होंने कहा कि पर्यूषण पर्व बाहरी दिखावे से दूर होकर स्वयं के भीतर झांकने और आत्मचिंतन करने की प्रेरणा देता है।
मध्यप्रदेश से आए अशोक कुमार और आर्ची जैन ने भगवान महावीर के जीवन और उनके उपदेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि संयमित जीवन, सत्य का पालन और सभी जीवों के प्रति करुणा से ही मानव जीवन सार्थक बनता है। प्रवाचकों ने क्रोध, अभिमान, माया और लोभ जैसे विकारों से दूर रहने तथा जीवन में क्षमा और त्याग की भावना अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अपनी गलतियों को स्वीकार कर उनमें सुधार करना ही सच्चे आत्मचिंतन की शुरुआत है।
जैन सभा भवन के अध्यक्ष सुमेर जैन ने बताया कि सुबह से होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों में श्रद्धालु उत्साहपूर्वक सहभागिता कर रहे हैं। शाम के प्रवचन में भी बड़ी संख्या में समाज के लोग पहुंच रहे हैं। पर्व के दौरान श्रद्धालु उपवास, पूजा और स्वाध्याय के साथ आत्मसंयम पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।