फोटो-21-बलरामपुर के अमरहवा गांव के पास खरझार पहाड़ी नाला पार बना बांस का पुल।-संवाद
महराजगंज तराई। तुलसीपुर तहसील के अमरहवा गांव के पास स्थित खरझार पहाड़ी नाले पर आज तक स्थायी पुल नहीं बन सका है। नतीजतन बरसात शुरू होते ही पूरेछीटन, तिवारीडीह, बड़का अमरहवा, छोटका अमरहवा, बुड़ंतापुर, नन्हुआपुर, रूपनगर, मिर्जापुर, सुगानगर, विजयीडीह, सुखदेव पुरवा और हिम्मतपुरवा समेत 20 से अधिक गांवों की करीब 20 हजार आबादी का मुख्य मार्ग से संपर्क लगभग तीन महीने तक प्रभावित रहता है।
समस्या से निपटने के लिए ग्रामीण हर वर्ष चंदा जुटाकर और श्रमदान कर बांस व लकड़ी का अस्थायी पुल तैयार करते हैं। इसी पुल के सहारे बच्चे स्कूल जाते हैं, किसान अपनी उपज बाजार तक पहुंचाते हैं और ग्रामीण रोजमर्रा का आवागमन करते हैं।
ग्रामीण शिवशंकर का कहना है कि वर्षों से अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से स्थायी पुल की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। इसलिए ग्रामीण हर साल अपने संसाधनों और श्रम से पुल बनाने को मजबूर हैं।
ग्रामीण प्रहलाद बताते हैं कि सबसे अधिक परेशानी तब होती है, जब किसी की तबीयत अचानक खराब हो जाए। एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती, इसलिए मरीजों को चारपाई पर लादकर बांस के पुल से नाला पार कराना पड़ता है। तेज बहाव के दौरान यह सफर जोखिम भरा होता है।
ग्राम प्रधान गवोधर ने बताया कि खरझार पहाड़ी नाले पर स्थायी पुल और संपर्क मार्ग के निर्माण की मांग कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। इस वर्ष भी ग्रामीणों ने स्वयं ही अस्थायी पुल का निर्माण शुरू कर दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह पुल केवल दो किनारों को नहीं, बल्कि 20 गांवों की शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आजीविका को जोड़ता है। उनका कहना है कि यदि स्थायी पुल का निर्माण हो जाए तो बरसात के दौरान होने वाली वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है।