बलरामपुर। जिले में फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनाने का खेल चल रहा है। जाली मुहर और हस्ताक्षर के सहारे धड़ल्ले से फर्जी प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे हैं। कुछ दिन पहले जिला महिला अस्पताल में यह मामला सामने आया था, अब ऐसा ही एक मामला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तुलसीपुर में सामने आया है।
तुलसीपुर क्षेत्र के नन्हुवापुर सुगानगर गांव की शकीना के दो बच्चों का जन्म प्रमाणपत्र जिला महिला अस्पताल के नाम से बनाया गया है। एक बच्चे की जन्मतिथि 25 दिसंबर 2018 तथा दूसरे बच्चे का जन्मतिथि पांच जनवरी 2019 दर्शाई गई है। दोनों बच्चों की जन्मतिथि में 11 दिन का अंतराल है। इसी तरह नन्हुवापुर सुगानगर गांव की ही गीता के दो बच्चों का जन्म प्रमाणपत्र भी 62 दिनों के अंतराल में बना दिया गया है। गीता के बच्चों का जन्म प्रमाणपत्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तुलसीपुर के नाम से जारी किया गया है।
प्रमाणपत्र में गीता की बेटी सीमा की जन्म तिथि नौ नवंबर 2018 तथा बेटा अंशू सोनकर का जन्म तिथि 10 जनवरी 2019 लिखी हुई है। दोनों जन्म प्रमाणपत्र के जारी करने की तिथि 22 अक्तूबर 2019 दर्ज है। ऐसे में जिला महिला अस्पताल व सीएचसी तुलसीपुर के नाम से फर्जी जन्म प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे हैं, लेकिन अधिकारियों का कुछ पता नहीं है।
अस्पताल के रजिस्टर में नहीं दर्ज है नाम
जिला महिला अस्पताल में संबंधित तिथि में शकीना नाम की महिला ने बच्चे को जन्म ही नहीं दिया है। जिला महिला अस्पताल के रजिस्टर में शकीना का नाम दर्ज नहीं है। जिला महिला अस्पताल के पटल बाबू ने बताया कि जन्म प्रमाणपत्र जो आईडी दर्ज है वो अस्पताल की नहीं है। दोनों जन्म प्रमाणपत्र पूरी फर्जी हैं।
मंडलायुक्त से की शिकायत
तुलसीपुर क्षेत्र के लोहेपनिया निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता व समाजसेवी महेंद्र तिवारी ने फर्जी जन्म प्रमाणपत्र जारी करने की शिकायत मंडलायुक्त देवीपाटन मंडल से की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि अधिकारियों के नाक के नीचे बलरामपुर में फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनाने का खेल चल रहा है, बावजूद इसके विभागीय अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
शुरू कराएंगे जांच
जिला अस्पताल व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से बनने वाले फर्जी जन्म प्रमाणपत्र की जांच कराई जाएगी। यदि अस्पताल की आईडी से जन्म प्रमाणपत्र बनाए गए हैं तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी, सीएमओ बलरामपुर